बीजिंग
चीन में बदलती आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के बीच एक अनोखा और चौंकाने वाला ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। यहां कई परिवार अपने प्रियजनों की अस्थियों को कब्रिस्तान की बजाय खाली पड़े फ्लैट्स में रखने लगे हैं।
बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन फ्लैट्स को अब ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ के नाम से जाना जाने लगा है। यहां लोग अपने रिश्तेदारों के अस्थि-कलश रखकर पारंपरिक धार्मिक रस्में भी निभाते हैं।
इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतिम संस्कार की बढ़ती लागत बताई जा रही है। चीन के बड़े शहरों में कब्रिस्तान में जगह की भारी कमी है, जिससे अंतिम संस्कार और दफनाने की प्रक्रिया बेहद महंगी हो गई है।
आर्थिक दबाव भी इस बदलाव की बड़ी वजह बनकर सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई इलाकों में संपत्ति की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक गिरावट आई है, जिससे खाली फ्लैट्स आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।
लोग इन खाली फ्लैट्स को किराए पर लेकर या खरीदकर उन्हें अस्थि-स्थल में बदल रहे हैं। परिवार के सदस्य समय-समय पर वहां जाकर श्रद्धांजलि देते हैं और पारंपरिक पूजा-पाठ करते हैं।
हालांकि, इस चलन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। सरकार का मानना है कि आवासीय परिसरों का इस तरह उपयोग सामाजिक और कानूनी समस्याएं पैदा कर सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार इस प्रथा पर रोक लगाने के लिए नए कानून की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित नियमों के तहत आवासीय फ्लैट्स में अस्थियां रखने और धार्मिक गतिविधियां करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
सरकार का तर्क है कि इस तरह की गतिविधियों से न केवल आवासीय व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि अन्य निवासियों के लिए असहज स्थिति भी पैदा होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड चीन की बदलती अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को दर्शाता है। पारंपरिक व्यवस्थाओं के महंगे होने के कारण लोग वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं।
कुछ लोग इसे व्यावहारिक समाधान मानते हैं, जबकि अन्य इसे सांस्कृतिक परंपराओं के खिलाफ बताते हैं। इस मुद्दे पर समाज में भी मतभेद देखने को मिल रहे हैं।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के नए नियम इस ट्रेंड को कितना प्रभावित कर पाते हैं और क्या लोग फिर से पारंपरिक अंतिम संस्कार की ओर लौटते हैं।


