सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बॉन्डी बीच पर 14 दिसंबर को हुए भीषण आतंकी हमले के आरोपी को दो महीने बाद अदालत में पेश किया गया। यह हमला यहूदी समुदाय के कार्यक्रम को निशाना बनाकर किया गया था और इसे बीते लगभग तीन दशकों में देश की सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी की घटनाओं में गिना जा रहा है।
24 वर्षीय आरोपी नवीद अकरम को वीडियो लिंक के माध्यम से सुपरमैक्स अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान वह लगभग पांच मिनट तक अदालत के समक्ष उपस्थित रहा। यह घटना के बाद उसकी पहली सार्वजनिक पेशी थी, जिस पर देशभर की नजरें टिकी थीं।
समाचार एजेंसियों के अनुसार पुलिस ने आरोपी पर कुल 59 गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें 15 हत्याओं के आरोप, 40 लोगों को घायल करने के इरादे से हमला करने के आरोप और एक आतंकवादी कृत्य से संबंधित आरोप शामिल हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि हमले की योजना सुनियोजित तरीके से तैयार की गई थी।
जांच एजेंसियों का दावा है कि अकरम ने अपने पिता साजिद के साथ मिलकर यह हमला किया था। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके पिता की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह हमला यहूदी त्योहार हनुक्का के दौरान आयोजित कार्यक्रम को लक्ष्य बनाकर किया गया था।
अदालत में पेशी के दौरान आरोपी अधिकतर समय चुप रहा और केवल न्यायाधीश के सीधे प्रश्नों का ही संक्षिप्त उत्तर दिया। उसके वकील बेन आर्चबोल्ड ने कहा कि इस चरण पर यह बताना जल्दबाजी होगी कि उनका मुवक्किल दोष स्वीकार करेगा या मुकदमे का सामना करेगा।
सुनवाई के दौरान सबूतों की समयरेखा पर भी चर्चा हुई। अभियोजन पक्ष ने डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखने की तैयारी का संकेत दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में निर्धारित की है।
इस बीच ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसी ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक माइक बर्गेस ने सीनेट में बयान देते हुए कहा कि हमलावरों ने अपनी साजिश को छिपाने के लिए अत्यधिक सावधानी बरती थी। उनके अनुसार आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला 1996 के बाद ऑस्ट्रेलियाई धरती पर हुई सबसे गंभीर आतंकी घटनाओं में से एक है। इससे देश में आंतरिक सुरक्षा और चरमपंथ के खतरे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
हमले के बाद यहूदी समुदाय में भय और आक्रोश का माहौल देखा गया था। सरकार ने समुदाय की सुरक्षा बढ़ाने और संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए थे।
अब अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा नीति और सामाजिक सौहार्द के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।


