मेरठ। बहुचर्चित ‘नीला ड्रम कांड’ यानी सौरभ हत्याकांड को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन यह सनसनीखेज वारदात आज भी लोगों को झकझोर देती है। 18 मार्च को इस घटना का खुलासा हुआ था, जिसने रिश्तों और भरोसे को खून से सना एक भयावह रूप दिखाया।
इस मामले में अब ट्रायल अंतिम दौर में पहुंच चुका है और जल्द ही फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, केस में कुल 34 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से करीब 20 के बयान दर्ज कराए जाने हैं। अब तक 17 गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है।
गवाही देने वालों में मृतक सौरभ राजपूत के परिजन, पुलिस अधिकारी, डॉक्टर, दुकानदार और अन्य संबंधित लोग शामिल हैं। इनमें सौरभ के भाई, मां, दोस्त, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, जांच अधिकारी और अन्य अहम गवाह शामिल रहे हैं, जिनके बयानों से केस की कड़ियां मजबूत हुई हैं।
जांच में सामने आया था कि सौरभ की हत्या के बाद उसकी पत्नी मुस्कान और उसका प्रेमी साहिल शुक्ला हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली और कसौल के होटलों में ठहरे थे। इन स्थानों के होटल मैनेजरों की गवाही अभी बाकी है, जो इस केस में अहम कड़ी मानी जा रही है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत होटल मैनेजरों द्वारा दिए गए सीसीटीवी फुटेज और प्रमाण-पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। कोर्ट में मैनेजर यह पुष्टि करेंगे कि प्रस्तुत किए गए साक्ष्य उन्हीं के द्वारा जारी किए गए हैं। इसके बाद गवाही की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
इसके पश्चात आरोपियों को कानून के तहत अपने पक्ष में सफाई देने का अवसर दिया जाएगा। फिर दोनों पक्षों के वकीलों की बहस होगी, जिसके बाद अदालत फैसला सुनाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद करीब एक माह के भीतर इस चर्चित हत्याकांड में निर्णय आ सकता है।


