परिषदीय स्कूलों में 10 दिन बैगलेस डे: बच्चों में कौशल, रचनात्मकता और अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की बड़ी पहल

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लखनऊ| उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों के लिए इस सत्र में 10 दिन ‘बैगलेस डे’ निर्धारित किए गए हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। शनिवार से लागू हुई इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों पर किताबों के बोझ को कम करना, उन्हें तनावमुक्त वातावरण देना और खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों तथा अनुभव आधारित शिक्षण के माध्यम से उनकी वास्तविक सीखने की क्षमता को बढ़ाना है। जहां इस व्यवस्था की शुरुआत अभी नहीं हो सकी है, वहां इसे अगले शनिवार से अनिवार्य रूप से शुरू किया जाएगा। इन बैगलेस दिनों में विद्यालयों में बच्चों के बहुआयामी विकास को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें कौशल आधारित गतिविधियाँ, समूह कार्य, कहानी सत्र, स्थानीय कला और शिल्प से जुड़ी कार्यशालाएँ, संवाद आधारित गतिविधियाँ, स्थानीय कारीगरों और व्यवसायियों से मुलाकात, खेल प्रतियोगिताएँ और जीवन कौशल को बढ़ाने वाले छोटे-छोटे प्रोजेक्ट शामिल होंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने परिषदीय उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के छात्रों के लिए ‘आनंदम मार्गदर्शिका’ विकसित की है, जिसके माध्यम से बच्चों को आनंदमय वातावरण में सीखने, व्यावहारिक एवं अनुभव आधारित शिक्षा से जुड़ने, अपनी रचनात्मकता और सोचने की क्षमता को बढ़ाने तथा समाज और स्थानीय संसाधनों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इस मार्गदर्शिका का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उन्हें जीवन कौशल, समस्या समाधान, सहयोग, संवाद, सामाजिक जुड़ाव और वास्तविक जीवन की समझ प्रदान करना है। यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बढ़ते शैक्षणिक दबाव के बीच बच्चों को ऐसे दिनों की जरूरत है, जहां वे स्कूल को बोझ नहीं बल्कि एक सकारात्मक, खुला और आनंदमय अनुभव के रूप में महसूस करें। सरकार का मानना है कि बैगलेस डे से बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में रुचि बढ़ेगी और वे नई चीजों को समझने के लिए अधिक सक्रिय व प्रोत्साहित होंगे। बैगलेस दिनों की तय तिथियाँ इस प्रकार हैं—नवंबर का तीसरा और चौथा शनिवार, दिसंबर का पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा शनिवार, जनवरी का तीसरा और चौथा शनिवार तथा फरवरी का पहला और दूसरा शनिवार। इस नई व्यवस्था से प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को एक नया और रचनात्मक शिक्षण अनुभव मिलने की उम्मीद है, जिसे अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा भी एक सकारात्मक और दूरगामी सुधार के तौर पर देखा जा रहा है।

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