नई दिल्ली। ठाणे नगरनिगम चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। विपक्ष के साथ मुकाबले के बीच अब राज्य की दो सहयोगी पार्टियां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना आपस में ही आमने-सामने नजर आ रही हैं। दोनों दलों ने गठबंधन पर सहमति न बनने के बाद अलग-अलग चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है, जिससे सियासी पारा अचानक चढ़ गया है।
ठाणे को एकनाथ शिंदे का गढ़ माना जाता है, लेकिन लंबे समय से सीटों के तालमेल को लेकर सहमति न बनने के चलते भाजपा ने पूरे शहर में अपने बैनर और पोस्टर लगाते हुए ‘नमो भारत, नमो ठाणे’ के नारे के साथ स्वतंत्र प्रचार अभियान छेड़ दिया है। भाजपा के इस कदम से नाराज शिंदे गुट की शिवसेना ने भी अलग से चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है और अपने स्तर पर जनसंपर्क तेज कर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा ठाणे में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती है, तो यह शिंदे शिवसेना के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। इसका असर न सिर्फ ठाणे बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ सकता है और महायुति के भीतर खींचतान और गहराने की आशंका है।
चुनाव को लेकर समय भी कम बचा है। 15 जनवरी को मतदान और 16 जनवरी को मतगणना प्रस्तावित है। देश की सबसे अमीर महानगरपालिकाओं में शुमार बीएमसी और उससे जुड़े स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर सभी दल पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
हालांकि, हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पार्टी की कोर मीटिंग में भाजपा नेताओं को साफ निर्देश दिए थे कि सहयोगी दलों—शिवसेना (शिंदे गुट) और अजित पवार की एनसीपी—के खिलाफ कोई आपत्तिजनक बयान न दिया जाए। इसके बावजूद ठाणे में शुरू हुआ अलग-अलग चुनाव प्रचार यह संकेत दे रहा है कि महाराष्ट्र की सियासत में आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।





