पटना। बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए ) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज कर ली है। इस जीत के साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित गठबंधन के सभी प्रत्याशी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे हैं।
इस चुनाव में सबसे बड़ा झटका महागठबंधन को लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, महागठबंधन के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने पूरा खेल बदल दिया और विपक्ष की रणनीति पूरी तरह फेल हो गई।
महागठबंधन को उम्मीद थी कि वह कम से कम एक सीट पर जीत दर्ज करेगा, लेकिन मतदान के दौरान कुछ विधायक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। इससे वोटों का गणित बिगड़ गया और एनडीए को पांचवीं सीट भी आसानी से मिल गई।
सूत्रों का कहना है कि अगर सभी विधायक मौजूद रहते तो मुकाबला कड़ा हो सकता था, लेकिन अंदरूनी असंतोष और तालमेल की कमी ने महागठबंधन को भारी नुकसान पहुंचाया।
चुनाव परिणाम के बाद दोनों पक्षों में बयानबाजी भी तेज हो गई है। महागठबंधन ने जहां दबाव की राजनीति का आरोप लगाया है, वहीं एनडीए ने इसे अपनी रणनीति और एकजुटता की जीत बताया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह परिणाम बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश देता है। इससे साफ है कि एनडीए अभी भी मजबूत स्थिति में है, जबकि विपक्ष को अपनी रणनीति और संगठन पर दोबारा काम करने की जरूरत है।
बिहार राज्यसभा चुनाव: एनडीए का क्लीन स्वीप, महागठबंधन की रणनीति फेल


