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Tuesday, April 7, 2026

बर्ड फ्लू का प्रकोप: चार जिलों में अलर्ट, लाखों पक्षी और अंडे नष्ट

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काठमांडू
हिमालयी देश नेपाल में बर्ड फ्लू का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। सरकार ने चार जिलों में एच5एन1 वायरस के फैलाव की पुष्टि की है, जिससे पशुपालन और जनस्वास्थ्य दोनों पर खतरा मंडरा रहा है।

यह प्रकोप मोरंग, सुनसरी, झापा और चितवन जिलों में सामने आया है, जहां अब तक 23 पोल्ट्री फार्म संक्रमित पाए गए हैं। प्रभावित इलाकों में सख्त निगरानी और नियंत्रण उपाय लागू किए गए हैं।

बर्ड फ्लू (H5N1) एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है, जो मुख्य रूप से पक्षियों में फैलता है, लेकिन कुछ मामलों में इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। यही वजह है कि इसे गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में देखा जाता है।

पशुधन सेवा विभाग के अनुसार, इस साल पहला मामला 18 मार्च को मोरंग जिले में सामने आया था। इसके बाद संक्रमण तेजी से अन्य जिलों तक फैल गया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। अब तक एक लाख 13 हजार से अधिक पक्षियों—जिनमें मुर्गियां और बत्तख शामिल हैं—को नष्ट किया जा चुका है।

इसके अलावा, संक्रमण को रोकने के लिए दो लाख 11 हजार से ज्यादा अंडों को भी नष्ट कर दिया गया है। यह कदम वायरस के प्रसार को सीमित करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही पर नजर रखी जा रही है और पोल्ट्री फार्मों में बायो-सिक्योरिटी उपायों को सख्ती से लागू किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह वायरस केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से इंसानों में भी संक्रमण फैल सकता है, जो कभी-कभी जानलेवा साबित होता है।

मानव संक्रमण के मामलों में सांस संबंधी दिक्कतें, आंखों में संक्रमण और अन्य लक्षण देखे जा सकते हैं। कुछ मामलों में बिना लक्षण के संक्रमण भी पाया गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, एच5एन1 वायरस पहली बार 1996 में सामने आया था और तब से यह दुनिया के कई हिस्सों में समय-समय पर प्रकोप का कारण बनता रहा है।

हाल के वर्षों में इस वायरस ने एशिया, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका तक अपनी पहुंच बना ली है। इससे वैश्विक स्तर पर पोल्ट्री उद्योग और वन्यजीवों को भारी नुकसान हुआ है।

नेपाल में बढ़ते मामलों को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों, खासकर भारत-नेपाल सीमा पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार के ये प्रयास इस प्रकोप को रोकने में कितने सफल होते हैं।

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