लखनऊ
प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना उनके बिजली मीटर को पोस्टपेड से प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है, जिससे न केवल असुविधा हो रही है बल्कि बिजली बिल भी पहले की तुलना में अधिक आ रहे हैं। इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है और प्रदेश के कई जिलों में उपभोक्ता ऊर्जा विभाग के खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिनमें से लगभग 70.50 लाख मीटर प्रीपेड मोड में हैं। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें इस बदलाव की पूर्व जानकारी या सहमति नहीं दी गई। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग अपने मीटर को फिर से पोस्टपेड मोड में बदलवाने के लिए अधिशासी अभियंताओं को आवेदन दे रहे हैं। विभागीय कार्यालयों में ऐसे पत्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे अधिकारियों पर काम का दबाव भी बढ़ गया है।
वहीं, हाल ही में लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उपभोक्ता का मीटर बिना उसकी अनुमति के प्रीपेड या पोस्टपेड में नहीं बदला जा सकता। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह उपभोक्ता की पसंद पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार का मीटर इस्तेमाल करना चाहता है। इसके बाद से उपभोक्ताओं के हौसले और बढ़ गए हैं और वे अपने अधिकारों को लेकर अधिक मुखर हो गए हैं।
ऊर्जा विभाग और पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों की ओर से इस मामले में फिलहाल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा का कहना है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद हैं, क्योंकि इसमें उपभोक्ता जितनी बिजली खर्च करता है, उतना ही भुगतान करता है और एकमुश्त बिल का बोझ नहीं पड़ता।
दूसरी ओर, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया है कि प्रदेश में जबरन प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं, जो कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन है। उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और ऊर्जा सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस विवाद के बीच कई उपभोक्ताओं के उदाहरण भी सामने आए हैं। लखनऊ के नीलमथा निवासी प्रमोद कुमार ने बताया कि उनके 14 साल पुराने कनेक्शन पर बिना अनुमति प्रीपेड मीटर लगा दिया गया, जिससे उनका बिजली बिल पहले से अधिक आने लगा है। वहीं जौनपुर के राम अवध सिंह का भी आरोप है कि मीटर बदलने के नाम पर उनके यहां प्रीपेड मीटर लगा दिया गया, जबकि उन्होंने पोस्टपेड की मांग की थी।
कुल मिलाकर, स्मार्ट मीटर को लेकर प्रदेश में असंतोष बढ़ता जा रहा है। उपभोक्ता जहां इसे अपनी सुविधा के खिलाफ बता रहे हैं, वहीं विभाग इसे आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था के रूप में पेश कर रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और ऊर्जा विभाग इस बढ़ते विवाद का समाधान किस तरह निकालते हैं और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


