25 नवंबर तक जियो-फेंसिंग अनिवार्य
लखनऊ| उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब कोई भी उर्वरक विक्रेता अपनी दुकान से अलग स्थान पर खाद नहीं बेच सकेगा। केंद्र और राज्य सरकार ने एल-1 पीओएस मशीनों की जियो-फेंसिंग को अनिवार्य कर दिया है, जिससे उर्वरक की बिक्री केवल दुकान परिसर से ही संभव होगी।
शासन की सख्ती के बावजूद कुछ विक्रेता चोरी-छिपे पसंदीदा किसानों को उर्वरक उपलब्ध करा देते थे और स्टॉक को खारिज दिखाने के लिए पीओएस मशीन लेकर किसानों के घर या दुकान से दूर जाकर उनका अंगूठा लगवा देते थे। कई निरीक्षणों में स्टॉक और खारिज की मात्रा में अंतर पाया गया। सरकार ने इस गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रित करने का निर्णय लिया है।
कृषि निदेशालय ने केंद्र सरकार के उर्वरक विभाग से मिले निर्देशों के आधार पर सभी जिलों को कहा है कि 25 नवंबर तक एल-1 पीओएस मशीनों की जियो-फेंसिंग की प्रक्रिया पूरी कर अपडेट कर दी जाए। नई व्यवस्था लागू होने के बाद पीओएस मशीन दुकान से दूर बिल्कुल काम नहीं करेगी। जियो-फेंसिंग से बिक्री का स्थान और समय स्वचालित रूप से दर्ज हो जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी तेगबहादुर सिंह ने सभी उर्वरक विक्रेताओं के साथ जूम बैठक कर इस व्यवस्था का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
फैसले की अहम बातें:
– जिन केंद्रों पर पीओएस मशीन उपलब्ध नहीं है या निष्क्रिय है, उनकी सूची अपडेट कर निदेशालय भेजी जाएगी।
– जियो-फेंसिंग की प्रक्रिया 30–40 सेकंड में पूरी होकर सिस्टम में दर्ज हो जाएगी।
– भारत सरकार ने उर्वरक वितरण प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी करने के लिए सभी पीओएस मशीनों को जियो-फेंसिंग से जोड़ने का निर्णय लिया है।





