9 C
Lucknow
Friday, January 16, 2026

बिजली (संशोधन) बिल 2025 और निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ मुखर हुए बिजली कर्मचारी

Must read

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि बिजली (संशोधन) बिल 2025 और बिजली के निजीकरण से जुड़े वित्तीय पैकेज को संसद के आगामी बजट सत्र में लाने की तैयारी की जा रही है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। समिति ने साफ किया है कि यदि यह प्रस्ताव संसद में पेश किया गया तो बिजली कर्मचारी देशव्यापी विरोध के लिए मजबूर होंगे।

संघर्ष समिति के अनुसार, बिजली के मामलों से जुड़ी संसदीय समिति की बैठक 18 दिसंबर को हुई थी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की। इसी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बिजली (संशोधन) बिल 2025 को संसद के बजट सत्र में पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही बिजली क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष वित्तीय पैकेज लाने की भी रूपरेखा तैयार की गई है।

समिति ने बताया कि प्रस्तावित वित्तीय पैकेज के तहत प्रदेश सरकारों को तीन विकल्प दिए जाएंगे। पहले विकल्प में राज्य के विद्युत वितरण निगमों की 51 प्रतिशत इक्विटी बेचकर उन्हें पीपीपी मॉडल पर चलाने का प्रावधान है। दूसरे विकल्प में 26 प्रतिशत इक्विटी बिक्री का प्रस्ताव है, लेकिन प्रबंधन पूरी तरह निजी हाथों में होगा। तीसरे विकल्प के तहत विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध किए जाने की बात कही गई है। संघर्ष समिति का कहना है कि इन तीनों विकल्पों का सीधा मतलब बिजली का निजीकरण है।

बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि बिजली के निजीकरण से न तो उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलेगी और न ही कर्मचारियों व अभियंताओं का भविष्य सुरक्षित रहेगा। समिति ने चेतावनी दी है कि ऐसे किसी भी प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया जाएगा। संघर्ष समिति ने यह भी जानकारी दी कि बिजली के मामलों की संसदीय समिति की अगली बैठक 3 फरवरी को प्रस्तावित है, जिसमें वित्तीय पैकेज और बिजली (संशोधन) बिल 2025 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है, ताकि इन्हें इसी बजट सत्र में संसद में पेश किया जा सके।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article