लखनऊ| उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग में अचानक तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे बिजली विभाग की चिंता बढ़ गई है। महज 5 दिनों के भीतर प्रदेश में बिजली की मांग करीब 3000 मेगावाट तक बढ़ गई है।
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 26 मार्च को बिजली की मांग 21,450 मेगावाट तक पहुंच गई, जबकि 10 मार्च को अधिकतम मांग 21,675 मेगावाट दर्ज की गई थी। इतनी कम अवधि में मांग में आई यह तेजी असामान्य मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में बढ़ोतरी के साथ एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे खपत में उछाल आया है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) और इंडक्शन चूल्हों का बढ़ता उपयोग भी बिजली की मांग बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनकर उभरा है।
अचानक बढ़ी मांग को देखते हुए बिजली विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। पावर कॉरपोरेशन आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त तैयारी में जुट गया है, ताकि आने वाले दिनों में किसी तरह की कटौती की नौबत न आए।
उधर, उपभोक्ता परिषद ने भी पावर कॉरपोरेशन से मांग की है कि बढ़ती खपत को देखते हुए समय रहते पर्याप्त इंतजाम किए जाएं, ताकि उपभोक्ताओं को गर्मी के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अप्रैल और मई में तापमान और बढ़ने के साथ बिजली की मांग नए रिकॉर्ड छू सकती है।
बिजली विभाग के लिए यह समय बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है, जहां बढ़ती मांग के बीच निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती


