एआई और ड्रोन तकनीक से पारदर्शिता बढ़ेगी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने चकबंदी प्रक्रिया (consolidation process) को पूरी तरह डिजिटल करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को भूमि सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जिससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि भू-माफियाओं पर भी नकेल कसी जा सकेगी।
अब तक चकबंदी से जुड़ी प्रक्रिया में किसानों को तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय, ऊर्जा और धन की भारी बर्बादी होती थी। लेकिन अब यह सब एक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि रिकॉर्ड में पारदर्शिता भी आएगी और हेराफेरी की संभावनाएं खत्म होंगी।
नई प्रणाली के तहत चकबंदी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा, जिससे जमीन के डिजिटल मानचित्र बनाए जा सकेंगे और खेतों की सटीक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा। इससे भूमि के पुनर्गठन में तेजी आएगी और पुराने विवादों को सुलझाने में आसानी होगी।
इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन को लेकर होने वाले विवादों में भारी कमी आएगी। चकबंदी के बाद खेतों की स्थिति, आकार और स्थान को लेकर जो भ्रम होता था, वह अब डिजिटल नक्शों के माध्यम से खत्म हो जाएगा।
डिजिटल चकबंदी प्रक्रिया से भू-माफियाओं की सक्रियता पर भी नियंत्रण लगेगा। फर्जीवाड़ा और कागजों में हेरफेर कर जमीन हथियाने की कोशिशों पर अब डिजिटल निगरानी रखी जा सकेगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान की भावना के अनुरूप है और इसका उद्देश्य है कि किसान सरल, पारदर्शी और तेज़ प्रक्रिया के माध्यम से अपने खेतों से जुड़े दस्तावेज़ों और सुविधाओं का लाभ उठा सकें। यह निर्णय भूमि सुधार, पारदर्शिता, किसानों की सुविधा और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है, जिसकी सराहना कृषि विशेषज्ञों और किसानों द्वारा की जा रही है।


