पिता हरिवंश राय बच्चन के आशियाने में वर्षों से नहीं आए अमिताभ बच्चन, आज हाल पूछने वाला भी नहीं
यूथ इंडिया | प्रयागराज हिंदी सिनेमा के महानायक कहे जाने वाले अमिताभ बच्चन भले ही दुनिया भर में सम्मान और लोकप्रियता के शिखर पर हों, लेकिन उनका पैतृक घर आज उपेक्षा और खामोशी का प्रतीक बनता जा रहा है। प्रयागराज स्थित वह घर, जहां से महान कवि हरिवंश राय बच्चन की साहित्यिक चेतना ने आकार लिया, आज वीरान हालात में खड़ा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अमिताभ बच्चन वर्षों से अपने पैतृक घर नहीं आए हैं। कभी साहित्य, संस्कृति और बौद्धिक विमर्श का केंद्र रहा यह आशियाना अब धीरे-धीरे समय और उपेक्षा की मार झेल रहा है। मकान के आसपास सन्नाटा पसरा रहता है और देखरेख के अभाव में इसकी स्थिति लगातार जर्जर होती जा रही है।
साहित्यिक विरासत पर सवाल
हरिवंश राय बच्चन की पहचान केवल एक कवि तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी। ऐसे में उनके नाम से जुड़ा यह घर आज बदहाली का शिकार है। साहित्य प्रेमियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि यह घर एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए था।
आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले कभी-कभार बाहर से लोग इस घर को देखने आते थे, लेकिन अब वह भी कम हो गया है। लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जिस घर ने देश को एक महान कवि दिया, उसी घर की सुध लेने वाला आज कोई नहीं है।
यह मामला केवल एक अभिनेता के अपने घर न आने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ा सवाल है, जिसे सहेजने की जिम्मेदारी समाज और व्यवस्था दोनों की है। क्या साहित्य और संस्कृति से जुड़े ऐसे स्थलों को यूं ही समय के भरोसे छोड़ दिया जाना चाहिए—यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है।






