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Saturday, March 21, 2026

सड़कों पर फेंके जा रहे लाखों टन आलू पर रोक की मांग, प्रधानमंत्री को भेजा मांग पत्र

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– कोल्ड स्टोरेज से निकलने वाले खराब आलू के निस्तारण और व्यावसायिक उपयोग के लिए नीति बनाने की मांग
फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रहे आलू उत्पादन और उसके बाद सड़कों पर फेंके जा रहे खराब आलू के मुद्दे को लेकर अब आवाज उठने लगी है। आलू विकास एवं विपणन सहकारी संघ लिमिटेड के निदेशक अशोक कटियार ‘एडवोकेट’ ने इस गंभीर समस्या को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि प्रदेश के 2207 शीतगृहों में लगभग 195 लाख मीट्रिक टन आलू का भंडारण किया जाता है। जब यह आलू मंडियों में बिक्री के लिए भेजा जाता है, तो छंटाई और पैकेजिंग के दौरान बड़ी मात्रा में सड़ा-गला और कटा-फटा आलू निकलता है। इस बेकार आलू को कोल्ड स्टोरेज मालिक अक्सर सड़कों के किनारे फेंक देते हैं।
इससे न केवल स्थानीय नागरिकों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ता है, बल्कि संक्रमण फैलने का भी खतरा बना रहता है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि इस खराब आलू का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर जैविक खाद या अन्य उत्पादों में उपयोग किया जाए, तो इससे किसानों और व्यापारियों को अतिरिक्त आय भी हो सकती है।
अशोक कटियार ने सुझाव दिया है कि सरकार इस दिशा में एक ठोस नीति बनाए, जिससे खराब आलू का उपयोग शराब, स्टार्च, चिप्स, कार्बोहाइड्रेट उत्पाद, पाउडर, दवाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में किया जा सके। इससे न केवल पर्यावरण को राहत मिलेगी बल्कि कृषि क्षेत्र को भी आर्थिक मजबूती मिलेगी।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्तमान कृषि व्यवस्था में “अधिक उत्पादन, अधिक नुकसान” जैसी स्थिति बनती जा रही है, जिस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि इस समस्या के समाधान के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित कर जांच कराई जाए और खराब आलू को सड़कों पर फेंकने के बजाय उसके व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नीति (पॉलिसी) बनाई जाए।

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