सवा पांच साल बाद मानवीय आधार पर शासन का अपवाद स्वरूप फैसला

लखनऊ| मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जातिवादी होने का आरोप लगाने के चलते वर्ष 2020 में सेवा से बर्खास्त किए गए अपर निजी सचिव अमर सिंह द्वितीय को शासन ने पुनः सेवा में बहाल कर दिया है। सचिवालय प्रशासन विभाग ने बर्खास्तगी के लगभग सवा पांच साल बाद यह आदेश जारी किया है। शासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय सामान्य परिस्थितियों में नहीं, बल्कि विशेष और मानवीय आधार पर अपवाद स्वरूप लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, अमर सिंह द्वितीय बीते 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले थे। इस दौरान उन्होंने स्वयं के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित होने का हवाला देते हुए सेवा में बहाली के लिए अनुरोध किया था। उनकी स्वास्थ्य स्थिति और व्यक्तिगत परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सहानुभूतिपूर्वक मामले पर विचार किया और बहाली के निर्देश दिए। इसके बाद सचिवालय प्रशासन विभाग ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर बहाली का आदेश जारी कर दिया।
गौरतलब है कि वर्ष 2020 में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर अमर सिंह द्वितीय ने सार्वजनिक रूप से जातिवाद के आरोप लगाए थे, जिनमें मुख्यमंत्री पर भी टिप्पणी की गई थी। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए शासन ने तत्काल प्रभाव से उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। उस समय यह कार्रवाई काफी चर्चा में रही थी और शासन ने स्पष्ट संदेश दिया था कि अनुशासन और मर्यादा से समझौता नहीं किया जाएगा।
अब सवा पांच साल बाद अमर सिंह द्वितीय की बहाली को लेकर शासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया है। सचिवालय प्रशासन विभाग के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह निर्णय किसी प्रकार की नजीर नहीं बनेगा और न ही इसे अन्य मामलों में उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।
शासन के इस फैसले के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अपवाद स्वरूप लिया गया असाधारण निर्णय मान रहे हैं। फिलहाल, अमर सिंह द्वितीय की सेवा में वापसी के साथ ही यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

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