यूथ इंडिया समाचार
फर्रुखाबाद। बीते दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम लोगों की जि़ंदगी को मुश्किल बना दिया है। शहर से लेकर गांव तक पानी भरने से हालात बिगड़ गए हैं। मुख्य मार्गों से लेकर गलियों तक जलभराव की समस्या ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। कई जगहों पर सडक़ें और नालियां पानी में डूबी पड़ी हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है।
लोग गली-मोहल्लों में पैदल चलने से भी कतराने लगे हैं, क्योंकि जगह-जगह कीचड़ और गंदे पानी का अंबार लगा हुआ है।बारिश का असर बाजारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कीचड़ और जलभराव के कारण ग्राहकों की आवाजाही बेहद कम हो गई है। दुकानदारों का कहना है कि पहले से ही मंदी के हालात हैं और अब लगातार बारिश ने बिक्री पर और बुरा असर डाल दिया है। व्यापारी दिनभर दुकानें खोलकर बैठे रहते हैं, लेकिन ग्राहक न के बराबर पहुंचते हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी चिंताजनक हो गए हैं। खेतों में पानी भर जाने से खरीफ की फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
धान और मक्का जैसी फसलें पानी में डूबने लगी हैं। किसान बेहद परेशान हैं और उनकी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि अगर यही स्थिति कुछ और दिनों तक बनी रही तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।लगातार बारिश ने स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी बढ़ा दी हैं। गांव और कस्बों में जलभराव के कारण मच्छरों का प्रकोप तेज हो गया है। डेंगू, मलेरिया और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
नालियों और गली-मोहल्लों में रुके पानी से बदबू फैल रही है और लोग संक्रमण की आशंका से दहशत में हैं।परिवहन व्यवस्था भी बारिश से पूरी तरह प्रभावित हुई है। शहर के अंदर कई प्रमुख मार्गों पर पानी भर जाने से वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है। सडक़ों पर बने गड्ढे बारिश के पानी में छिप गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में कई कच्चे रास्ते कीचड़ में बदल गए हैं, जिससे बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत हो रही है।लोगों का कहना है कि नगर पालिका और प्रशासन की लापरवाही के कारण यह स्थिति और गंभीर हो रही है। समय पर नालों की सफाई नहीं होने और जल निकासी की व्यवस्था न होने से बारिश का पानी घंटों और दिनों तक भरा रह जाता है। प्रशासन भले ही जलभराव की समस्या के निस्तारण का दावा करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।लगातार हो रही बारिश ने लोगों के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
जहां एक ओर किसानों की फसलें चौपट होने के कगार पर हैं, वहीं शहर और कस्बों में बाजार सुने पड़ गए हैं। गली-मोहल्लों में जलभराव और गंदगी से लोग बीमारियों के डर में जी रहे हैं। बारिश ने आम आदमी से लेकर व्यापारी और किसान सभी को प्रभावित कर दिया है और लोग अब आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं कि कब बारिश थमे और जिंदगी सामान्य हो सके।






