जनता से संवाद का अवसर रोकने का आरोप, विपक्ष और प्रशासन के बीच बढ़ा तनाव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडेय के बरेली दौरे पर प्रशासन ने अचानक रोक लगा दी है। उनके नेतृत्व में आज एक प्रतिनिधिमंडल बरेली का दौरा करने वाला था, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें यात्रा की अनुमति नहीं दी।
इस रोक के बाद माता प्रसाद पांडेय के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। आसपास के इलाकों में वाहन जांच और सघन निगरानी की गई। प्रशासन का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया।
माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया कि यह रोक प्रशासन की विफलताओं और कमियों को छुपाने की कोशिश है। उन्होंने कहा,
“हम जनता की समस्याओं को देखने और सुनने के लिए बरेली जा रहे थे, लेकिन प्रशासन हमें रोक रहा है। यह लोकतंत्र और जनता के अधिकारों के खिलाफ है।”
प्रतिनिधिमंडल में सपा के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल होने वाले थे। उनके इस दौरे का उद्देश्य बरेली जिले के स्थानीय मुद्दों को जनता के बीच जाकर समझना और समाधान के लिए दबाव बनाना था। लेकिन प्रशासन की ओर से अचानक रोक लगने से सपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई।
सपा नेताओं ने प्रशासन की इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जनता से संवाद करने का अधिकार नहीं दिया गया, तो वह कानूनी और राजनीतिक स्तर पर संघर्ष करेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं राजनीतिक तनाव को बढ़ाती हैं और विपक्ष तथा सरकार के बीच विश्वास की खाई को और गहरा करती हैं। सपा कार्यकर्ता सोशल मीडिया और जनसंपर्क अभियान के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और आगामी दिनों में विरोधी कार्यक्रम चलाने की योजना बना रहे हैं।




