लखनऊ| राज्य शहरी विकास एजेंसी (सूडा) के निदेशक ने पीएम स्वनिधि योजना के लंबित आवेदनों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी बैंकों को जल्द से जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं। निदेशक ने स्पष्ट कहा कि योजना के तहत लगभग 1.30 लाख आवेदन अब भी लंबित पड़े हैं, जिससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में गंभीर देरी हो रही है।
सूडा की ओर से लगातार मॉनिटरिंग और बैंक स्तर पर समन्वय स्थापित किए जाने के बावजूद आवेदनों की गति धीमी बनी हुई है। निदेशक ने कहा कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो योजना का लाभ असंगठित क्षेत्र के रेहड़ी-पटरी संचालकों तक समय पर नहीं पहुंच पाएगा।
निदेशक ने जानकारी दी कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में ही ऋण स्वीकृति के 61 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं, जबकि 13 हजार से ज्यादा आवेदन ऋण वितरण की प्रतीक्षा में हैं। इसी तरह पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 19 हजार से अधिक आवेदन स्वीकृति के स्तर पर लंबित हैं, जबकि पांच हजार से अधिक आवेदन वितरण के लिए रुके हुए हैं।
उन्होंने बैंकों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करें और लाभार्थियों को समय पर ऋण उपलब्ध कराएं, ताकि योजना का उद्देश्य—छोटे व्यवसायियों को आर्थिक संबल—सार्थक हो सके।





