बांग्लादेश में हाल की घटनाओं ने देश के कपड़ा उद्योग पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। नोबेल पुरस्कार विजेता और अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस की 2025 में की गई भविष्यवाणी अब चर्चा में है। यूनुस ने अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन के साथ इंटरव्यू में दावा किया था कि भारत पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारतीय कंपनियां भारत छोड़कर बांग्लादेश में फैक्ट्रियां लगाएँगी। उनका तर्क था कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ ज्यादा हैं, जबकि बांग्लादेश को कम टैरिफ मिला है, जिससे भारतीय उद्योग यहाँ निवेश करेंगे।
लेकिन 2026 की हकीकत काफी अलग है। जनवरी के अंत तक बांग्लादेश का घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार पर खड़ा है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने घोषणा की है कि 1 फरवरी 2026 से देश की सभी टेक्सटाइल मिलें अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी जाएंगी। BTMA के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने बताया कि मिल मालिकों के पास बैंक लोन चुकाने की क्षमता समाप्त हो गई है, पूंजी 50% से अधिक घट चुकी है, और कई मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं।
स्थानीय मिलों का आरोप है कि भारत से आने वाले सस्ते सूत ने घरेलू बाजार को तहस-नहस कर दिया है। लगभग 12,000 करोड़ टका का स्थानीय स्टॉक बिना बिका पड़ा है। इसके अलावा गैस की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन क्षमता 50% तक गिर गई है। BTMA ने सरकार से मांग की है कि आयात पर ड्यूटी-फ्री सुविधा वापस ली जाए और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
इस संकट में नया कारक भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भी बनकर सामने आया है। यह डील बांग्लादेश के गारमेंट निर्यात के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाली है। वर्तमान में बांग्लादेश LDC (अल्प विकसित देश) होने के कारण EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस पाता है, जबकि भारत को 12% टैक्स देना पड़ता है।
FTA लागू होने के बाद भारत को भी 0% टैरिफ मिलेगा। भारत के पास अपने कच्चे माल—कपास और सूत—की पर्याप्त उपलब्धता है। ड्यूटी हटने के बाद भारतीय कपड़े बांग्लादेशी कपड़ों की तुलना में सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले उपलब्ध होंगे। इसका सीधा असर बांग्लादेश की प्रतिस्पर्धी स्थिति पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026-27 तक बांग्लादेश LDC श्रेणी से बाहर होने जा रहा है। इसका मतलब यह है कि उसका EU में ड्यूटी-फ्री कोटा खत्म हो जाएगा और भारतीय कंपनियां वहां का बड़ा हिस्सा कब्जा कर सकती हैं। यूरोप में हर तीसरे व्यक्ति के डेनिम पर बांग्लादेशी ब्रांड का दबदबा है, लेकिन भारत-ईयू डील के बाद यह बाजार भारतीय कंपनियों के हाथ में जाने का खतरा बढ़ जाएगा।
यूनुस जहां भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं बांग्लादेश की वास्तविकता यह है कि उसका घरेलू ‘बैकवर्ड लिंकेज’—सूत और कपड़ा बनाने वाली मिलें—घाटे और बंद होने के कगार पर है। इसका मतलब है कि देश के भीतर उत्पादन ढांचा कमजोर पड़ रहा है।
देश की आर्थिक अस्थिरता और उच्च उत्पादन लागत भी मिलों के बंद होने में योगदान दे रहे हैं। स्थानीय उद्योगों की हालत इस समय इतनी गंभीर है कि श्रमिकों के लिए रोजगार और उत्पादकों के लिए निवेश दोनों जोखिम भरे हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश ने तत्काल उपाय नहीं किए, तो न केवल घरेलू कपड़ा उद्योग प्रभावित होगा, बल्कि निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था भी गंभीर संकट में फंस सकती है। बांग्लादेश को अब नीति निर्माण, टैरिफ नियंत्रण और ऊर्जा आपूर्ति में सुधार लाने की आवश्यकता है।
संक्षेप में कहा जाए तो यूनुस की भविष्यवाणी अब उलट गई है। जहां उन्होंने भारत के निवेश को बांग्लादेश के लिए अवसर बताया था, वहीं हकीकत यह है कि देश का अपना उद्योग संकट में है और भारत-ईयू FTA आने के बाद प्रतिस्पर्धा और कठिन हो जाएगी। यह बांग्लादेश के कपड़ा सेक्टर के लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण दौर साबित हो सकता है।


