नई दिल्ली| बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले के पंगशा इलाके में बुधवार रात एक और भयावह घटना सामने आई, जिसमें हिंदू युवक अमृत मंडल की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। यह घटना उस्मान हादी की हालिया मौत के बाद भड़की हिंसा का नवीनतम उदाहरण है और देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रही है।
अभिनेता मनोज जोशी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “गाजा या फिलिस्तीन में कुछ होने पर तो सब लोग आगे आते हैं, लेकिन बांग्लादेश में किसी हिंदू की हत्या होने पर कोई आगे नहीं आता। यह बहुत दुख की बात है। समय ही इसका जवाब देगा।”
हिंसा और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बीच अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के विशेष सहायक खुदा बख्श चौधरी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें जुलाई के विद्रोह और 10 नवंबर, 2024 को विशेष सहायक नियुक्त किया गया था, ताकि पुलिस और कानून प्रवर्तन एजेंसियों में अनुशासन और मनोबल बहाल किया जा सके।
इस बीच, बांग्लादेश ने आगामी राष्ट्रीय चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक गतिविधियों को भी तेज कर दिया है। बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान शुक्रवार को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराएंगे और शनिवार को बोगुरा-6 निर्वाचन क्षेत्र से नामांकन पत्र लेंगे। उनकी पार्टी 2026 के आम चुनाव में जीत हासिल करने पर ही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने का वादा कर रही है।
अल्पसंख्यकों के अधिकारों और सुरक्षा को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। दीपू दास की हत्या के बाद ढाका और अन्य क्षेत्रों में कारखाने के श्रमिकों, छात्रों और मानवाधिकार समूहों ने व्यापक प्रदर्शन किया। भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की है।
17 साल बाद लंदन से लौटे तारिक रहमान के आने के साथ ही देश में सियासी तापमान बढ़ गया है। वह जियाउर्रहमान की कब्र पर जाएंगे, जुमे की नमाज में शामिल होंगे और राष्ट्रीय शहीद स्मारक का दौरा करेंगे। इस बीच हिंसा और तनाव के बीच प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती बढ़ गई है।

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