नई दिल्ली/कर्नाटक। राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” को लेकर देश में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। गीत के सभी पदों को अनिवार्य रूप से गाने और उसमें मौजूद धार्मिक संदर्भों को लेकर मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां इस पर कानूनी बहस शुरू हो गई है।
मामला उस निर्देश से जुड़ा है, जिसमें स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में “वंदे मातरम” के सभी पद गाने की बात कही गई थी। इस पर आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि गीत के तीसरे से छठे पदों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है, जिससे इसे सभी छात्रों के लिए अनिवार्य करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ हो सकता है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि केवल पहले दो पदों को ही आधिकारिक रूप से मान्यता दी जाए, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इन्हीं पदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था।
इस मुद्दे पर अनिवार्यता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि इसे स्कूलों में अनिवार्य किया जाता है, तो यह छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
हालांकि, इससे पहले इसी विषय पर सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि “वंदे मातरम” गाना अनिवार्य नहीं है और इसे लेकर कोई बाध्यता नहीं बनाई गई है।
अब कर्नाटक हाईकोर्ट इस पूरे मामले की सुनवाई कर रहा है, जहां यह तय होगा कि संबंधित निर्देश संविधान के अनुरूप हैं या नहीं।
यह विवाद अब एक बड़े सवाल में बदल गया है—राष्ट्रभक्ति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाए। फिलहाल, पूरे देश की नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हुई है।
वंदे मातरम पर छिड़ा विवाद, अनिवार्यता और धार्मिक संदर्भों को लेकर हाईकोर्ट में चुनौती


