फर्रुखाबाद। नगर क्षेत्र में इन दिनों आवारा बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे शहरवासियों का जीना दूभर हो गया है। नगर पालिका अभी तक आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान नहीं कर पाई थी कि अब बंदरों की बढ़ती संख्या ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। मोहल्लों में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं, जिससे आम नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
शहर के कई इलाकों में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग अपने घरों की छतों और आंगनों में जाने से भी डरने लगे हैं। खासतौर पर रात के समय बंदरों की चहल-कदमी ज्यादा देखने को मिल रही है। आधी रात तक बंदरों के झुंड मोहल्लों में इधर-उधर घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों में दहशत का माहौल बना रहता है। कई बार बंदर घरों की छतों पर कूदते-फांदते हैं और दरवाजों-खिड़कियों पर भी आ धमकते हैं।
नगर के मदारवाड़ी, इस्माईलगंज सानी, सेठ वाली गली और नई बस्ती जैसे प्रमुख मोहल्लों में बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदरों के झुंड अचानक घरों में घुस आते हैं और खाने-पीने का सामान उठा ले जाते हैं। कई बार बंदर लोगों को डराने-धमकाने के साथ-साथ नुकसान भी पहुंचा देते हैं। इससे बच्चों और बुजुर्गों के बाहर निकलने में भी खतरा बना रहता है।
क्षेत्रीय निवासियों ने कई बार इस समस्या को लेकर नगर पालिका प्रशासन से शिकायत की है, लेकिन अभी तक बंदरों को पकड़ने या उन्हें शहर से दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
नागरिकों का यह भी कहना है कि नगर पालिका को तत्काल प्रभाव से बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए, ताकि शहरवासियों को इस समस्या से राहत मिल सके। फिलहाल प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई न होने के कारण क्षेत्रीय वाशिंदों में रोष और भय का वातावरण व्याप्त है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया तो वे इस मुद्दे को लेकर प्रशासन के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


