लखनऊ| प्रदेश सरकार के बजट प्रबंधन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग का प्रदर्शन निराशाजनक सामने आया है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग को मिली धनराशि के सापेक्ष कई महत्वपूर्ण योजनाओं में एक भी रुपये का उपयोग नहीं हो सका है, जिससे औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इस स्थिति को लेकर राजधानी लखनऊ में विभागीय कामकाज पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार MSME विभाग के बजट खर्च में सबसे अधिक धनराशि मेला और प्रदर्शनी जैसे आयोजनों पर खर्च की गई है, जबकि लघु उद्योगों के विकास, क्लस्टर निर्माण और आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकीं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कई योजनाओं में फाइलें अभी तक आगे ही नहीं बढ़ पाई हैं, जिससे आवंटित बजट खर्च होने से पहले ही निष्क्रिय बना हुआ है।
पिछले दिनों MSME विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बजट को समय से खर्च करने और योजनाओं को धरातल पर उतारने को लेकर गंभीर चर्चा की गई थी। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि लंबित प्रस्तावों पर तेजी से निर्णय लिया जाए, लेकिन इसके बावजूद अब तक ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। इसका सीधा असर छोटे उद्यमियों और स्थानीय उद्योगों पर पड़ रहा है, जिन्हें सरकारी योजनाओं से लाभ मिलना था।
लघु उद्योग क्लस्टर विकास योजना की स्थिति इस लापरवाही की सबसे बड़ी मिसाल मानी जा रही है। इस योजना के तहत 115 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक महज 3.43 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। यह आंकड़ा कुल बजट का बेहद छोटा हिस्सा है और इससे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बजट का उपयोग नहीं किया गया तो यह राशि लैप्स हो सकती है, जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
लखनऊ में उद्योग जगत से जुड़े लोग और जानकार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब MSME सेक्टर को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, तो फिर इसके विकास से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही। उनका कहना है कि यदि बजट का सही और संतुलित उपयोग किया जाए तो छोटे उद्योगों को मजबूती मिल सकती है और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
फिलहाल MSME विभाग के कमजोर बजट खर्च को लेकर शासन स्तर पर भी असंतोष की चर्चा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में विभाग से विस्तृत जवाब-तलब किया जा सकता है और योजनाओं की धीमी प्रगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।





