फर्रुखाबाद। गंगा नदी के उफान से फर्रुखाबाद जनपद के हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 20 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया है। हालांकि बीते 24 घंटों में जलस्तर में लगभग 5 सेंटीमीटर की मामूली गिरावट आई है, लेकिन कटान का खतरा कम नहीं हुआ है। प्रशासन का कहना है कि नरौरा बैराज से पानी छोड़े जाने की वजह से फिलहाल हालात पर नज़र बनाए रखना बेहद जरूरी है।बाढ़ का सबसे बड़ा असर कायमगंज और कमालगंज तहसील क्षेत्र में देखने को मिला है। गंगा किनारे बसे गांवों में खेत जलमग्न हो गए हैं, तो वहीं कटान ने कई परिवारों को बेघर कर दिया है। पंखियन की मड़ैया क्षेत्र में केवल दो दिनों के भीतर पांच पक्के मकान गंगा में समा गए, जबकि कई झोपड़ियां भी ढह गईं। ग्रामीण लगातार असुरक्षा के साए में जीने को मजबूर हैं।दुःखद घटना कायमगंज क्षेत्र में हुई, जहां पूर्व प्रधान प्रवेश यादव नहाते समय बाढ़ के पानी में डूब गए। करीब दो घंटे की खोजबीन के बाद उनका शव बरामद किया गया। इस हादसे ने बाढ़ के खतरे को और भयावह बना दिया है।इस बीच, प्रशासन ने राहत और बचाव कार्यों की गति तेज कर दी है। स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाना शुरू कर दिया है। रामपुर जोगराजपुर गांव में आयोजित स्वास्थ्य शिविर में अब तक 82 मरीजों का उपचार किया गया। वहीं, राजेपुर ब्लॉक के एक दर्जन गांवों—रामपुर, परतापुर, अंबरपुर, चित्रकूट और जमापुर सहित—में दवाइयां, ORS, जिंक टैबलेट और सैनिटरी पैड वितरित किए गए।जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि राहत कार्यों की निगरानी लगातार की जा रही है। नावों और राहत शिविरों की व्यवस्था बढ़ाई गई है, ताकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन पर संपर्क करें।

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