सीबीआई जांच में कई राज बेनकाब

लखनऊ| झांसी में सेंट्रल जीएसटी विभाग में फैली घूसखोरी के एक बड़े रैकेट का सीबीआई ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया है कि छापों के दौरान कारोबारियों के ठिकानों से बरामद महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जीएसटी कार्यालय में जमा करने के बजाय अफसर अपने घर ले गए थे। बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कारोबारियों को डराकर उनसे मोटी रिश्वत वसूलने की साजिश रची गई। इस पूरे खेल में जीएसटी मामलों के अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता की भी अहम भूमिका सामने आई है, जिसने अफसरों से सांठगांठ कर घूस की रकम वसूलने में मदद की।
सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि छापे के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज यदि कार्यालय में जमा किए जाते तो उनसे कुल टैक्स चोरी की सही राशि का आकलन किया जा सकता था। लेकिन दस्तावेज निजी तौर पर रखे जाने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि छापों में कितने करोड़ रुपये की टैक्स चोरी उजागर हुई थी। अब सीबीआई इस मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए जल्द ही अदालत से अनुमति लेकर आरोपियों के बैंक लॉकर खुलवाने की तैयारी कर रही है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि सेंट्रल जीएसटी के एक डिप्टी कमिश्नर की एनसीआर क्षेत्र में कई संपत्तियां हैं, जिनके दस्तावेज भी बरामद हुए हैं।
बताया गया है कि झांसी में सेंट्रल जीएसटी अफसरों के एक संगठित घूसखोरी रैकेट की गोपनीय सूचना मिलने के बाद सीबीआई ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की थी। अफसरों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए तो आपसी बातचीत से रिश्वत के लेनदेन की परतें खुलती चली गईं। इसके बाद सीबीआई ने पूरी योजना के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।
सीबीआई ने बुधवार को झांसी में 70 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए सेंट्रल जीएसटी के तीन अफसरों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इनके साथ जीएसटी मामलों के अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता और जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रोपराइटर राजू मंगनानी को भी हिरासत में लिया गया। सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए एक गोपनीय स्थान पर ले जाया गया, जहां उनसे लगातार लंबी पूछताछ की जा रही है। कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया, जिससे स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। शाम के समय जब जीएसटी विभाग के अन्य अफसरों को कार्रवाई की जानकारी मिली तो कई ने अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिए।
सूत्रों के अनुसार, सीबीआई की टीम ने मंगलवार को ही झांसी में डेरा डाल दिया था। एजेंसी को जानकारी मिली थी कि सेंट्रल जीएसटी अफसर ट्रैप कार्रवाई रोकने के बदले बड़े पैमाने पर लेनदेन की तैयारी कर रहे हैं। इसी इनपुट के आधार पर अफसरों को सीबीआई के रडार पर लिया गया।
बुधवार सुबह सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने शहर में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। सीपरी बाजार स्थित नमो होम्स निवासी सेंट्रल जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, सेवाराम मिल कंपाउंड निवासी अधीक्षक अनिल तिवारी, अजय कुमार शर्मा, आरएनएस वर्ल्ड स्कूल के पास रहने वाले जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रोपराइटर राजू मंगनानी और इलाहाबाद बैंक तिराहे के पास रहने वाले अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई टीम ने इन सभी के पास से कुल 1.70 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि करीब आठ दिन पहले जय दुर्गा हार्डवेयर के प्रतिष्ठान पर सेंट्रल जीएसटी टीम ने छापा मारा था। उसी कार्रवाई से जुड़े मामले में 70 लाख रुपये की घूस की मांग की गई थी। अब सीबीआई इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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