– कूट रचना कर एस.के.एम. इंटर कॉलेज व महिला डिग्री कॉलेज की मान्यता हड़पने का बड़ा खेल उजागर
– जिलाधिकारी से उच्च स्तरीय जांच टीम गठित कर कार्रवाई की मांग, राजस्व रिपोर्टों में सरकारी जमीन पर कब्जे का भी खुलासा
फर्रुखाबाद। जिले के शिक्षा जगत में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। नवाबगंज के मोहम्मदाबाद रोड स्थित कृष्णा पब्लिक स्कूल के भवन में प्रबंधक द्वारा “कूट रचित तरीके से तथ्यों का गोपन” कर पहले एस.के.एम. इंटर कॉलेज और उसके बाद एस.के.एम. महिला डिग्री कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने का चौंकाने वाला मामला उजागर हुआ है।
पत्रकार शरद कटियार द्वारा जिलाधिकारी को प्रस्तुत ताज़ा प्रत्यावेदन में पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने और दोषियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की गई है।
पहले भी हुई थी जांच — सभी आरोप पाए गए थे सत्य
मामला कोई नया नहीं है। पहले भी जिलाधिकारी के आदेश संख्या 11174/ओएसडी/2020 दिनांक 19 सितम्बर 2020 के क्रम में प्रार्थी के पत्र की जांच उपजिलाधिकारी कायमगंज, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक की संयुक्त टीम ने की थी।
उस जांच में गंभीर अनियमितताओं और जालसाजी का खुलासा हुआ था — समिति ने अपनी रिपोर्ट में सभी आरोपों को सत्य पाया था।
एफआईआर का आदेश दबा दिया गया – उच्च अधिकारियों को किया गया गुमराह
उन्होंने वर्ष 2022 में भी शिकायत प्रस्तुत की थी, जिस पर जिलाधिकारी ने प्रबंध समिति और प्रधानाचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए थे।
लेकिन सूत्रों के अनुसार, षड्यंत्रपूर्वक उस कार्रवाई को दबा दिया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रबंधक अवधेश मिश्रा, निवासी भोलेपुर, फतेहगढ़, ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए न सिर्फ स्थानीय प्रशासन को बल्कि माननीय उच्च न्यायालय को भी भ्रमित किया।
उन्होंने अपनी याचिका में एस.के.एम. इंटर कॉलेज को वित्तपोषित संस्थान बताकर न्यायालय को गुमराह किया, जबकि हकीकत में वह वित्तविहीन संस्थान है।
मामला जब माध्यमिक शिक्षा निदेशक तक पहुंचा, तो प्रबंधक ने स्पेशल अपील दाखिल कर विभागीय अधिकारियों को भी प्रभावित किया।
इसके चलते जिला विद्यालय निरीक्षक नरेंद्र पाल सिंह द्वारा गठित त्रिस्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट को दरकिनार कर भ्रामक रिपोर्ट तैयार कराई गई — जिससे मान्यता प्रत्याहरण (मान्यता निरस्तीकरण) की कार्रवाई रोक दी गई।
शिकायत के साथ संलग्न राजस्व जांच रिपोर्ट के अनुसार, कृष्णा पब्लिक स्कूल का भवन गाटा संख्या 198, चांदपुर, नवाबगंज पर दर्शाया गया है।
इसी भूमि पर प्रबंधक ने बाद में एस.के.एम. महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना कर ली, जबकि अभिलेखों में कृष्णा पब्लिक स्कूल आज भी संचालित दिखाया जा रहा है।
यानि, पहले उसी भवन को इंटर कॉलेज के नाम पर दिखाकर मान्यता ली गई और अब उसी को महिला डिग्री कॉलेज घोषित कर दिया गया।
यह पूरी प्रक्रिया शिक्षा विभागीय नियमों, इंटरमीडिएट एजुकेशन एक्ट और राजस्व कानूनों का खुला उल्लंघन है।
इतना ही नहीं, प्रबंधक पर सरकारी भूमि, चारागाह और दलितों की भूमि पर अवैध कब्जा कर कॉलेज निर्माण का भी आरोप है।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब दो बार जांच में जालसाजी और अनियमितताएं सिद्ध हो चुकी हैं, तब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या कुछ अधिकारियों ने भी प्रबंधक के प्रभाव में आकर मामले को दबाया?
पत्रकार शरद कटियार ने आरोप लगाया है कि “यह पूरा मामला प्रशासनिक मिलीभगत का प्रतीक है — जहां एक ही भवन को तीन बार अलग-अलग संस्थान बताकर शासन को ठगा गया और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया।”
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि पूर्व की सभी जांच रिपोर्टों और राजस्व अभिलेखों को संज्ञान में लेकर एक उच्च स्तरीय जांच टीम गठित की जाए,
और दोषी प्रबंधक सहित संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
यह मामला अब फर्रुखाबाद जिले की शैक्षिक प्रणाली की साख और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों के लिए कसौटी बन चुका है।
देखना होगा कि जिलाधिकारी इस “शिक्षा के नाम पर खेल” करने वाले माफिया नेटवर्क पर क्या कार्रवाई करते हैं।




