बाढ़ का कहर: राजेपुर में ग्रामीण बहा, 200 गांव डूबे, 1.5 लाख आबादी प्रभावित

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फर्रुखाबाद गंगा और रामगंगा का बाढ़ का पानी अब जानलेवा बन गया है। राजेपुर थाना क्षेत्र के ग्राम जिठौली में सोमवार शाम करीब 7:45 बजे एक बड़ी घटना हुई, जब मदन सिंह (45 वर्ष), पुत्र प्रमोद सिंह, साइकिल से अपने घर लौटते समय करीब तीन फीट ऊंची बाढ़ की तेज धार में बह गए और पास ही स्थित तालाब में डूब गए। घटनास्थल से उनकी चप्पल और साइकिल बरामद हुई है। सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और खोजबीन शुरू की, लेकिन तालाब में फैली जलकुंभी के कारण तलाश में कठिनाई आ रही है। पांचाल घाट से बुलाए गए गोताखोरों की टीम उनकी तलाश कर रही है, जबकि परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। जिलेभर में बाढ़ से हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 200 से अधिक गांव पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं और करीब डेढ़ लाख की आबादी संकट में है। लगभग 12,000 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। हजारों दुधारू पशु चारे और पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। सैकड़ों कच्चे मकान या तो ढह चुके हैं या फिर पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। सबसे ज्यादा असर राजेपुर, कमालगंज, शमशाबाद, अमृतपुरकायमगंज कम्पिल क्षेत्र के गांवों पर पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक महीने से लगातार उतार चढ़ाव वाले पानी ने उनका जीवन अस्त व्यस्त कर दिया है। लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। नाव और राहत सामग्री की भारी कमी है जिससे हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रशासन पूरी गंभीरता से बाढ़ प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई गई है और प्रत्येक प्रभावित गांव में टीम भेजी जा रही है। गोताखोर और एनडीआरएफ की मदद से खोजबीन कराई जा रही है। वहीं बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गंगा और रामगंगा में लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थिति बिगड़ी है, लेकिन जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग का दावा है कि सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था की गई है और आवश्यक राहत सामग्री बांटी जा रही है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी मदद जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पा रही और लोग अपने स्तर पर ही सुरक्षित स्थानों तक जाने को मजबूर हैं। फर्रुखाबाद की यह बाढ़ अब केवल संपत्ति और फसलों का नुकसान नहीं कर रही, बल्कि लोगों की जान के लिए भी सीधा खतरा बन चुकी है और जिठौली की घटना ने पूरे जिले को दहला दिया है।

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