अयोध्या में ठेलेवालों को दी गई ‘तालिबानी सजा’, नगर निगम कर्मचारियों ने गरीबों से कराया उठक-बैठक, भड़की जनता

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अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में नगर निगम के कर्मचारी ठेला लगाकर रोज़ी-रोटी कमाने वाले गरीब फेरीवालों को दीवार के सहारे उल्टा खड़ा कराते और उनसे उठक-बैठक करवाते दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही पूरे शहर में आक्रोश फैल गया है। लोग इसे “तालिबानी सजा” बताते हुए नगर निगम की कार्रवाई की तीखी निंदा कर रहे हैं।
वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ गरीब ठेलेवाले सड़क किनारे अपने ठेले लगाए हुए थे। तभी नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और बिना किसी नोटिस या चेतावनी के कार्रवाई शुरू कर दी। जिन लोगों ने ठेला लगाया था, उन्हें सरेआम अपमानित करते हुए दीवार के सहारे उल्टा खड़ा किया गया। कुछ से उठक-बैठक भी कराई गई। इस दौरान आसपास मौजूद लोग यह दृश्य देखकर हैरान रह गए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि ठेले वाले वर्षों से यहां पर छोटे स्तर पर कारोबार करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। लेकिन इस तरह से सरेआम बेइज्जत करना न केवल गलत है, बल्कि मानवाधिकारों का भी खुला उल्लंघन है। वीडियो सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
अयोध्या के सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यापारिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “शहर की छवि पर धब्बा” बताया है। समाजसेवी अमित त्रिपाठी ने कहा, “यह तालिबानी रवैया है। गरीबों से इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन को तत्काल जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
वहीं नगर निगम के कुछ अधिकारियों ने सफाई दी कि अभियान अतिक्रमण हटाने के लिए चलाया गया था, लेकिन इस तरह की हरकत अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है। जिलाधिकारी ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि, “गरीबों के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी ने मर्यादा का उल्लंघन किया है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अयोध्या जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील शहर में इस तरह की घटना ने प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाना जरूरी है, लेकिन इंसानियत बनाए रखना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
शहर भर में चर्चा है कि अगर नगर निगम गरीबों की मदद के बजाय उन्हें सरेआम अपमानित करेगा, तो इससे जनता और प्रशासन के बीच भरोसा कमजोर होगा। फिलहाल मामले की जांच शुरू हो गई है और वीडियो वायरल होने के बाद उच्च अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों से जवाब तलब किया है।

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