लखनऊ| रामलला की पावन नगरी अयोध्या को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर नई ऊंचाई देने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय के निर्माण के लिए टाटा संस को 27 एकड़ अतिरिक्त भूमि सौंपने का निर्णय लिया है। इस भूमि के आवंटन के बाद संग्रहालय का कुल क्षेत्रफल 52 एकड़ से अधिक हो जाएगा, जिससे इसे भव्यता और विस्तृत स्वरूप के साथ विकसित करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कुल 21 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 20 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई। इन्हीं में अयोध्या संग्रहालय से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी शामिल था। बैठक के उपरांत वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि टाटा समूह के सहयोग से संचालित टाटा ट्रस्ट ने अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) निधि से अयोध्या में एक अत्याधुनिक, भव्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप मंदिर संग्रहालय विकसित करने की इच्छा प्रकट की है।
सरकार का मानना है कि इस संग्रहालय के निर्माण से अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों, इतिहास और सभ्यता पर आधारित यह संग्रहालय दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों के लिए एक कृति स्वरूप होगा। इसमें प्राचीन कला, शास्त्र, संस्कृति, स्थापत्य, रामायणकालीन यात्राओं, आध्यात्मिक धरोहर और भारतीय इतिहास के विविध आयामों को आधुनिक तकनीक से प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि इस विशाल परियोजना से अयोध्या में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं के लिए ट्रेनिंग, टूरिज्म, गाइडिंग, प्रबंधन, हस्तशिल्प और अन्य क्षेत्रों में काम के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही, बढ़ते पर्यटक आवागमन से होटल, परिवहन, खाद्य और हस्तशिल्प उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा।
टाटा ट्रस्ट द्वारा संग्रहालय के निर्माण से लेकर संचालन तक की जिम्मेदारी उठाने से यह परियोजना वित्तीय और प्रबंधकीय दृष्टि से मजबूत आधार पर आगे बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि अयोध्या को विश्वस्तरीय पर्यटन नगर के रूप में स्थापित करने के लिए यह कदम मील का पत्थर साबित होगा।






