लखनऊ| प्रदेश में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मेरठ, संभल, शाहजहांपुर और हरदोई जिलों में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) विकसित करने को अंतिम स्वीकृति दे दी गई है। इसके साथ ही यूपीडा ने इन परियोजनाओं के लिए कंपनियों से प्रस्ताव भी आमंत्रित कर लिए हैं। चारों शहरों में बनने वाले इन क्लस्टरों पर कुल अनुमानित लागत 274 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
यह सभी परियोजनाएं ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर विकसित की जाएंगी, जिनमें निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पांच वर्षों तक संचालन एवं रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) भी शामिल रहेगा। प्रस्तावित आईएमएलसी में उद्योगों और लॉजिस्टिक इकाइयों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क, आरसीसी ड्रेनेज, बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति, स्ट्रीट और हाई मास्ट लाइटिंग, फायर स्टेशन, ओवरहेड टैंक, बोरवेल, फेंसिंग और साइनज जैसे आधुनिक बुनियादी ढांचे विकसित किए जाएंगे, जिससे एकीकृत और सुव्यवस्थित औद्योगिक वातावरण उपलब्ध हो सके।
हरदोई में बनने वाले आईएमएलसी पर करीब 69.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यहां 30 मीटर तक चौड़ी आंतरिक सड़कें, आरसीसी ड्रेनेज, तीन ओवरहेड टैंक, चार बोरवेल, लगभग सात किलोमीटर लंबा जलापूर्ति नेटवर्क, बिजली वितरण प्रणाली, हाई मास्ट लाइटिंग, प्रवेश द्वार और फेंसिंग का निर्माण प्रस्तावित है। इस क्लस्टर से कृषि आधारित उद्योगों और लघु उद्योगों को मजबूत लॉजिस्टिक सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
मेरठ में प्रस्तावित आईएमएलसी की अनुमानित लागत 70.94 करोड़ रुपये रखी गई है, जबकि संभल में यह लागत 97.32 करोड़ रुपये होगी। वहीं शाहजहांपुर में बनने वाले क्लस्टर पर करीब 36.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। इन चारों परियोजनाओं के पूरा होने से न सिर्फ औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और उत्तर प्रदेश को औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।

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