फर्रुखाबाद। बार एसोसिएशन तहसील सदर के सचिव अतुल मिश्रा ने स्वयं पर लगाए जा रहे आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि उनका कथित माफिया अनुपम दुबे या उसके भाइयों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि वे एक अधिवक्ता हैं, कातिब (बैनामा लेखक) नहीं, और न ही उन्होंने कभी अनुपम दुबे या उसके परिजनों के बैनामे लिखे हैं।
अतुल मिश्रा ने जारी बयान में कहा कि वे तहसील सदर में बार के निर्वाचित पदाधिकारी हैं और सक्रिय रूप से वकालत करते हैं। उनका कार्य न्यायालय में अधिवक्ताओं और वादकारियों के हितों की पैरवी करना है। उन्होंने दो टूक कहा कि “मैं बैनामे लिखने वाला वकील नहीं हूं, बल्कि अधिवक्ता हितों और न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान के लिए आवाज उठाने वाला अधिवक्ता हूं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीते रविवार को वे थाना कादरी गेट अधिवक्ता हित में पैरवी करने गए थे। इसका किसी भी आपराधिक तत्व या व्यक्ति विशेष से कोई संबंध नहीं था। उनका कहना है कि अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए बार पदाधिकारियों का थाने या प्रशासनिक कार्यालय जाना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
हाल के घटनाक्रम में उनका नाम कथित रूप से माफिया तत्वों से जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रचारित किए जाने को उन्होंने निराधार और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहें न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हैं, बल्कि बार एसोसिएशन की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं।
अतुल मिश्रा ने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शी रहा है और वे लगातार अधिवक्ताओं के हितों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। यदि किसी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य है तो वह संबंधित मंच पर प्रस्तुत करे, अन्यथा बेबुनियाद आरोपों से परहेज किया जाए।
बार एसोसिएशन के कुछ सदस्यों ने भी अनौपचारिक रूप से कहा कि संगठन अपने पदाधिकारियों की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाना चाहिए।






