– खाकी के इक़बाल को बदनाम करने की साजिश
– अपराधी तंत्र के इशारे पर वायरल किया जा रहा वीडियो
राजेपुर /फर्रुखाबाद: थाना राजेपुर (Police Station Rajepur) में तैनात सिपाही दीपेश छौकर से जुड़ा एक कथित वीडियो (video) सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिस तरह पुलिस विभाग को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई, अब उसी मामले में नया मोड़ सामने आया है।जानकारी के अनुसार वायरल किया गया वीडियो करीब दो वर्ष पुराना बताया जा रहा है, जिसे वर्तमान परिप्रेक्ष्य से जोड़कर प्रसारित किया गया।जिसमे हसीं मज़ाक की वार्तालाप को दूसरा रूप देने की कोशिश हुईं है, इस खेल मे दलाल मीडिया की भूमिका सामने आई है।
प्रारंभिक तौर पर वीडियो के आधार पर गंभीर आरोप लगाए गए थे, लेकिन अब स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यह पूरा प्रकरण एक सुनियोजित छवि धूमिल करने का प्रयास हो सकता है। स्थानीय लोगों और पुलिस सूत्रों का कहना है कि सिपाही दीपेश छौकर अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। अपराध नियंत्रण और क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने में उनकी सहभागिता रही है।
समर्थकों का आरोप है कि एक ईमानदार और सक्रिय पुलिसकर्मी को निशाना बनाकर उसकी कार्यशैली पर सवाल उठाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि यदि किसी वीडियो की सत्यता और समय-सीमा की पुष्टि किए बिना उसे वायरल किया जाता है, तो इससे न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे पुलिस महकमे की छवि प्रभावित होती है।
कुछ स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि तथाकथित “दलाल मीडिया” और व्यक्तिगत खुन्नस रखने वाले लोगों ने पुराने वीडियो को तोड़-मरोड़ कर प्रसारित किया। उनका कहना है कि दो साल पुराने कथित वीडियो को वर्तमान से जोड़कर सनसनी फैलाने का प्रयास किया गया, जिससे पुलिस विभाग को बदनाम किया जा सके।
राजेपुर क्षेत्र के कई नागरिकों का कहना है कि पुलिस ने बीते वर्षों में अपराध नियंत्रण को लेकर प्रभावी कदम उठाए हैं। ऐसे में बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी भी सामग्री को आधार बनाकर विभाग की निष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है।
लोगों का मानना है कि यदि कोई भी आरोप है तो उसकी जांच विभागीय स्तर पर होनी चाहिए, न कि सोशल मीडिया ट्रायल के जरिए किसी को दोषी ठहराया जाए।
मामले को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यदि वीडियो वास्तव में पुराना है, तो उसे वर्तमान घटनाक्रम से जोड़ना भ्रामक है। लोगों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए और अनावश्यक विवाद समाप्त हो।


