राम लड़ैती अवस्थी ने किया था पहला कल्पवास
फर्रुखाबाद।अमृतपुर तहसील के गांव बली पट्टी रानी गांव के गंगा घाट पर माघ मास में करीब 80 के दशक में राम नगरिया लगा करती थी। कालांतर में परिस्थितियों के चलते यह मेला बंद हो गया और पांचाल घाट पर रामनगरिया में यहां के लोग जाने लगे और मेल ने वृहद रूप धारण कर लिया।
बुजुर्गों के अनुसार तहसील अमृतपुर के ग्राम बलीपट्टी रानीगांव के गंगा घाट पर अस्सी के दशक मे राम नगरिया लगना शुरू हुआ था। एक दशक से अधिक समय तक यह राम नगरिया मेला बलीपट्टी रानीगांव के गंगा घाट पर लगता रहा। ग्रामीणों के सहयोग से लगने वाली इस राम नगरिया मे कल्पवासियों की संख्या दो सैकड़ा तक पहुंच गई थी। परंतु 90 के दशक के अंत मे गंगा नदी के कटरी क्षेत्र मे दस्यु गिरोहों की बढ़ती चहलकदमी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से कल्पवासियों ने आना कम कर दिया था और धीरे धीरे यह रामनगरिया मेला समाप्त हो गया।
रानीगांव निवासी नारायण दीक्षित बताते हैं यहां सर्वप्रथम करनपुर दत्त निवासी राम लड़ैती अवस्थी कल्पवास करने पहुंची थी। उन्होंने सन् 1982 मे यहां एक महीने तक झोपड़ी डालकर कल्पवास किया था। अगले वर्ष से कल्पवासियों संख्या बढ़ने लगी धीरे धीरे यह संख्या बढ़कर दो सैकड़ा तक पहुंच गई थी। उसमे पड़ोसी जनपद हरदोई और शाहजहांपुर के लोग भी शामिल थे।उस समय यहां कल्पवास करने वालों मे मुख्य रूप से हरदोई जिले से पंडित लज्जाराम आते थे। करनपुर दत्त निवासी रिटायर्ड शिक्षिका राम सीता अपनी मां के साथ कल्पवास करने आती थी। परमापुर निवासी जोगराज इस मेले मे कल्पवास करते थे और कल्पवासियों और प्रतिदिन गंगा स्नान करने आने वाले लोगों को प्रसाद बनाकर बेचते थे। मेला राम नगरिया मे पड़ोसी जनपद शाहजहांपुर के बानगांव से आने वाले कथा वाचक पंडित सूरदास का जिक्र आते ही लोग उनके साथ आने वाले ढोलक मास्टर रामपाल को याद करने लगते हैं। रामपाल के ढोलक बजाने की आज भी लोग तारीफ करते हैं। गांव के निवासी अनिल अग्निहोत्री बताते हैं कि निजी संसाधनों से लगने वाली इस राम नगरिया मे ग्रामीण चंदा कर कल्पवासियों के लिए व्यवस्थाएं जुटाते थे। राम नगरिया मेले के दौरान ही बलीपट्टी रानीगांव के गंगा घाट पर हर अमावस्या और पूर्णमासी को मेला लगना शुरू हुआ था जो आज भी लग रहा है और बड़ी संख्या मे लोग अमावस्या और पूर्णमासी को यहां गंगा स्नान करने आते हैं।मृतपुर के ग्राम बलीपट्टी रानीगांव के गंगा घाट पर अस्सी के दशक मे राम नगरिया लगना शुरू हुआ था। एक दशक से अधिक समय तक यह राम नगरिया मेला बलीपट्टी रानीगांव के गंगा घाट पर लगता रहा। ग्रामीणों के सहयोग से लगने वाली इस राम नगरिया मे कल्पवासियों की संख्या दो सैकड़ा तक पहुंच गई थी। परंतु 90 के दशक के अंत मे गंगा नदी के कटरी क्षेत्र मे दस्यु गिरोहों की बढ़ती चहलकदमी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से कल्पवासियों ने आना कम कर दिया था और धीरे धीरे यह रामनगरिया मेला समाप्त हो गया। बलीपट्टी रानीगांव निवासी नारायण दीक्षित बताते हैं यहां सर्वप्रथम करनपुर दत्त निवासी राम लड़ैती अवस्थी कल्पवास करने पहुंची थी। उन्होंने सन् 1982 मे यहां एक महीने तक झोपड़ी डालकर कल्पवास किया था। अगले वर्ष से कल्पवासियों संख्या बढ़ने लगी धीरे धीरे यह संख्या बढ़कर दो सैकड़ा तक पहुंच गई थी। उसमे पड़ोसी जनपद हरदोई और शाहजहांपुर के लोग भी शामिल थे।उस समय यहां कल्पवास करने वालों मे मुख्य रूप से हरदोई जिले से पंडित लज्जाराम आते थे। करनपुर दत्त निवासी रिटायर्ड शिक्षिका राम सीता अपनी मां के साथ कल्पवास करने आती थी। परमापुर निवासी जोगराज इस मेले मे कल्पवास करते थे और कल्पवासियों और प्रतिदिन गंगा स्नान करने आने वाले लोगों को प्रसाद बनाकर बेचते थे। मेला राम नगरिया मे पड़ोसी जनपद शाहजहांपुर के बानगांव से आने वाले कथा वाचक पंडित सूरदास का जिक्र आते ही लोग उनके साथ आने वाले ढोलक मास्टर रामपाल को याद करने लगते हैं। रामपाल के ढोलक बजाने की आज भी लोग तारीफ करते हैं। गांव के निवासी अनिल अग्निहोत्री बताते हैं कि निजी संसाधनों से लगने वाली इस राम नगरिया मे ग्रामीण चंदा कर कल्पवासियों के लिए व्यवस्थाएं जुटाते थे। राम नगरिया मेले के दौरान ही बलीपट्टी रानीगांव के गंगा घाट पर हर अमावस्या और पूर्णमासी को मेला लगना शुरू हुआ था जो आज भी लग रहा है और बड़ी संख्या मे लोग अमावस्या और पूर्णमासी को यहां गंगा स्नान करने आते हैं।






