अटल जी का कार्यकाल भारतीय लोकतंत्र में स्थिरता व नैतिक मूल्यों का स्वर्णिम अध्याय- अमरनाथ यादव
अटल जन्मशताब्दी के तहत जारी में आयोजित हुआ विधानसभा बारा का सम्मेलन
प्रयागराज: अटल जन्मशताब्दी समारोह के अंतर्गत जारी स्थित गडैया चन्द्रमुखी गेस्ट हाउस में “अटल स्मृति” (Atal Smriti) विधानसभा बारा का सम्मेलन भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) द्वारा आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। सम्मेलन के मुख्य अतिथि काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अमरनाथ यादव ने कहा कि पंडित अटल बिहारी वाजपेई का कालखंड भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में केवल सत्ता परिवर्तन या राजनीतिक स्थिरता का अध्याय नहीं है, बल्कि वह संवेदनशील राष्ट्रीय चेतना का विस्तार है, जिसमें सैनिक, शहीद और उनके परिवार राष्ट्र की आत्मा के केंद्र में प्रतिष्ठित दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि अटल जी के शासनकाल में नीति और संख्या के साथ-साथ संवेदना, कृतज्ञता और नैतिक दायित्व भी शासन की भाषा का हिस्सा थे। कवि हृदय अटल बिहारी वाजपेई ने सैनिकों को केवल रणनीतिक आवश्यकता नहीं, बल्कि संस्कृति और नैतिक मूल्य के रूप में देखा। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना जैसे ऐतिहासिक कार्य आज भी उनके सुशासन की याद दिलाते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ल ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और ऐतिहासिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए उन्हें भारतीय राजनीति का प्रेरणास्रोत बताया। विशिष्ट अतिथि जिला सह-प्रवासी कविता पटेल ने संगठन से सत्ता तक अटल जी की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन केवल भाषणों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में सुशासन का जीवंत उदाहरण है।
अटल जी ने सत्ता का शिखर संगठन की सीढ़ियों से चढ़कर प्राप्त किया, जहां व्यक्ति से पहले विचार, पद से पहले संगठन और सत्ता से पहले संघर्ष को महत्व दिया गया। सम्मेलन में बारा विधानसभा के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के उपरांत एसआईआर की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। उक्त जानकारी भाजपा जिला मीडिया प्रभारी दिलीप कुमार चतुर्वेदी ने दी।


