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Sunday, February 1, 2026

ज्योतिष से सभी समस्याओं का समाधान संभव, बशर्ते नियमों का पालन किया जाए : आचार्य कृष्णकांत

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क्रासर काल सर्प योग के साथ ही अन्य विषयों पर पढ़े गये शोध-पत्र

फर्रुखाबाद: मेला राम नगरिया (Fair Ram Nagariya) के सांस्कृतिक पंडाल में आयोजित ज्योतिष सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए ज्योतिषाचार्यों (astrologer) ने ज्योतिष विज्ञान से जुड़े विविध विषयों पर शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। सम्मेलन में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ज्योतिष के माध्यम से जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान संभव है, आवश्यकता केवल विश्वास और बताए गए नियमों का विधिवत पालन करने की है।

कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य कपिल ध्वज मिश्र की वाणी वंदना से हुआ। इसके उपरांत आचार्य प्रवेश चतुर्वेदी ने कालसर्प योग पर आधारित शोध पत्र प्रस्तुत कर उसके प्रभाव और निवारण पर विस्तार से प्रकाश डाला। हरिओम त्रिवेदी ने हस्तरेखाओं की सत्यता और उनके महत्व को सरल शब्दों में समझाया। वहीं कमल प्रपन्नाचार्य ने भारतीय ज्योतिष के सामाजिक प्रभाव और उसकी उपयोगिता को रेखांकित किया।

हरदोई से आए ज्योतिषाचार्य सुशील कुमार अग्निहोत्री ने ज्योतिष और आयुर्वेद के परस्पर संबंधों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार दोनों विज्ञान मिलकर रोगों के निदान में सहायक सिद्ध होते हैं। कार्यक्रम के संचालक एवं संयोजक डॉ. कृष्णकांत अक्षर ने ज्योतिष में आकाशीय ग्रहों के प्रभाव, उनके महत्व तथा उचित उपायों के माध्यम से जीवन को सुखमय बनाने की विधियों को विस्तार से प्रस्तुत किया।

अध्यक्षता कर रहे बदायूं के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य राम बहादुर पांडेय ने कहा कि ज्योतिष केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में पढ़ी और पढ़ाई जाने वाली मान्य विज्ञान शाखा है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष को विश्व विज्ञान की मान्यता प्राप्त हो चुकी है और इसमें प्रत्येक समस्या व रोग के समाधान की क्षमता है। आचार्य ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री ने मांगलिक दोष का विवेचन करते हुए उसके व्यावहारिक समाधान बताए।

मुख्य अतिथि के रूप में अपर जिलाधिकारी दिनेश कुमार ने सम्मेलन में उपस्थित रहकर विद्वानों के ज्ञान और अनुभव की सराहना की। उन्होंने कहा कि ज्योतिष विज्ञान जीवन की गहराइयों तक पहुंचकर समस्याओं के समाधान की दिशा दिखाता है। कार्यक्रम के अंत में मेला सचिव एवं व्यवस्थापक द्वारा सभी ज्योतिषाचार्यों का सम्मान किया गया। संयोजक डॉ. कृष्णकांत अक्षर ने सभी आगंतुक विद्वानों एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ज्योतिष में रुचि रखने वाले लोग उपस्थित रहे।

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