जालौन/कालपी: जनपद जालौन में अवैध मौरंग खनन का खेल लगातार बढ़ता जा रहा है। कालपी क्षेत्र के तरीबुल्दा और हीरापुर की खदानों में खनन माफियाओं ने खुलेआम नियमों को ताक पर रख दिया है। आरोप है कि माफियाओं ने नदी में ही अस्थायी पुल बनाकर दिन-रात अवैध खनन शुरू कर दिया है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नदी की जलधारा में बना दिया अड्डा
बताया जा रहा है कि खनन माफियाओं ने नदी की बीच जलधारा में पहुंचने के लिए अस्थायी पुल बना दिया है। इसी रास्ते से भारी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए लगातार मौरंग निकाली जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात-दिन खनन जारी है, जिससे पर्यावरण और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को भी नुकसान पहुंच रहा है।
एनजीटी के नियमों की उड़ रही धज्जियां
इस पूरे मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। नदी की जलधारा के बीच खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन इसके बावजूद माफिया बेखौफ होकर खनन कर रहे हैं।
खनन माफियाओं का खुला चैलेंज
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि खनन से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों ने प्रशासन को ही चुनौती दे दी है। आरोप है कि रवि पंजवानी और अमित परमानी जैसे खनन से जुड़े लोगों ने “रोक सको तो रोक लो” वाली नीति अपनाते हुए खुलेआम अवैध खनन जारी रखा है।
इस पूरे मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि एसडीएम मनोज कुमार सिंह की शह पर खनन माफिया सक्रिय हैं और उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
लगातार हो रहे अवैध खनन से क्षेत्र के लोगों में रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है। लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


