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Tuesday, March 31, 2026

ख़ामोशी टूटी, गर्म हुईं सियासत : मंत्री असीम अरुण पर निकाली पूर्व सांसद सुब्रत नें भड़ास

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– बोले, मेरे ऊपर जब लिखा था मुकदमा तब क्यों नहीं किया था दखल
– जिलाधिकारी का मंत्री से गलत व्यवहार के कारण और समर्थन की बात हुईं जगजाहिर
– अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ मंत्री पर साधा निशाना
– पुरानी खुन्नस सड़कों पर आई, हजम नहीं हो रही कन्नौज की खुशबू में असीम की सियासत
कन्नौज। जनपद की राजनीति में अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। भाजपा के नेता एवं पूर्व सांसद सुब्रत पाठक और प्रदेश सरकार में मंत्री पूर्व आईपीएस असीम अरुण के बीच लंबे समय से चल रही अंदरूनी नाराजगी अब सार्वजनिक बयानबाजी तक पहुंच गई है, जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
मीडिया के सामने आए बयान में पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने अपने खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2023 में उनके विरुद्ध बिना ठोस जांच के प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जबकि उस समय उन्होंने किसी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं दी। अब उन्होंने सीधे तौर पर इशारों में कहा है कि उस समय सत्ता और प्रशासनिक स्तर पर बैठे लोगों को हस्तक्षेप करना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पाठक नें पुलिस चौकी में घुसकर किया था हुडदंग और दारोगा संग की थी मारपीट, जिसमे उनके विरुद्ध दर्ज हुआ था मुकदमा।
सुब्रत पाठक ने मंत्री अरुण असीम पर इशारे में यह भी आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक रूप से कमजोर करने और छवि खराब करने की कोशिश की गई थी । उन्होंने कहा कि यदि उस समय सही जांच होती तो सच्चाई पहले ही सामने आ जाती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का सम्मान करते हुए उन्होंने संयम रखा, लेकिन अब समय आ गया है कि पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में मंत्री असीम अरुण का नाम चर्चा में आने से राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। हालांकि मंत्री की ओर से अब तक इस मामले में कोई सीधा बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रही अनबन अब खुलकर सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, यह विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि क्षेत्रीय राजनीतिक वर्चस्व से भी जुड़ा हुआ है। दोनों नेताओं का प्रभाव कन्नौज और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत रहा है, ऐसे में इस टकराव को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे मामले ने भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी स्तर पर भले ही सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया न दी गई हो, लेकिन अंदरखाने इस विवाद को सुलझाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
फिलहाल, यह देखना अहम होगा कि यह सियासी टकराव आगे किस दिशा में जाता है और क्या पार्टी नेतृत्व इस बढ़ती खींचतान को शांत कर पाता है या फिर यह विवाद और गहराता है।
बताना जरुरी है हाल ही में जिलाधिकारी कन्नौज नें मंत्री को नीचा दिखाने में कोई कोर कसर बकाया नहीं छोड़ी थी, उस घटनाक्रम में पूरा दिमाग़ किसी और का था।

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