
प्रशांत कटियार
भारत का संविधान केवल कानूनों का संकलन नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष, त्याग और दूरदृष्टि का परिणाम है, जिसे भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने पूरे जीवन से सींचा। यह वही संविधान है, जिसने आज़ादी के बाद बिखरे हुए भारत को एक राष्ट्र के रूप में खड़ा किया, करोड़ों नागरिकों को अधिकार दिए और सबसे कमजोर व्यक्ति को भी सम्मान के साथ जीने की गारंटी दी। लेकिन यह एक गंभीर और चिंताजनक सच है कि आज देश में ऐसे लोग भी हैं, जो खुलेआम संविधान का विरोध कर रहे हैं, उसकी आत्मा पर सवाल उठा रहे हैं और उसे कमजोर करने की भाषा बोल रहे हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसा विद्वान, जिनके पास विश्व की श्रेष्ठ यूनिवर्सिटियों की 32 डिग्रियां थीं, जो नौ भाषाओं के जानकार थे और जिन्होंने दर्जनों विषयों में गहन अध्ययन किया था, उन्होंने भारत जैसे विविध देश के लिए संविधान लिखा। उन्होंने हर वर्ग, हर धर्म, हर जाति और हर विचारधारा को ध्यान में रखकर ऐसा ढांचा बनाया, जिसमें किसी को डरने की जरूरत न पड़े। संविधान लागू हुआ, लेकिन न देश में अराजकता फैली, न समाज टूटा। यह इस बात का प्रमाण है कि संविधान किसी जल्दबाजी या नकल का परिणाम नहीं, बल्कि गहन बौद्धिक मेहनत और ईमानदार सोच का नतीजा है।
आज स्थिति इसके उलट दिखाई देती है। कुछ लोग संविधान को दोष देने लगे हैं, कभी उसे विदेशी बताकर, तो कभी उसे बदलने की बातें कर के। यह वही लोग हैं जो स्वयं बनाए गए कानूनों की खामियां स्वीकार करते हुए दिनभर सफाई देते नजर आते हैं। जिन कानूनों को लागू करते ही देश में असंतोष फैल जाता है, वही लोग बाबा साहब के संविधान पर उंगली उठाने का दुस्साहस करते हैं। यह विरोध संविधान का नहीं, बल्कि समानता, न्याय और अधिकारों का विरोध है।
संविधान का विरोध करने वाले यह भूल जाते हैं कि यही संविधान उन्हें बोलने की आज़ादी देता है, सत्ता तक पहुंचने का रास्ता देता है और विरोध करने का अधिकार भी देता है। अगर संविधान कमजोर होगा, तो सबसे पहले वही लोग असुरक्षित होंगे, जो आज उसे निशाना बना रहे हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी किसी देश ने अपने मूल संविधान और मूल्यों से छेड़छाड़ की, तो उसका परिणाम अराजकता और विभाजन के रूप में सामने आया।
बाबा साहब अंबेडकर ने संविधान में केवल अधिकार नहीं दिए, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने की सीख भी दी। उन्होंने नैतिकता, व्यवहारिकता और ईमानदारी को शासन की नींव बनाया। आज संविधान के विरोध के पीछे असल समस्या यही है कि कुछ लोगों को बराबरी स्वीकार नहीं, उन्हें वह संविधान खटकता है जो आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी आवाज देता है।
आज जब संविधान पर हमले हो रहे हैं, तब बाबा साहब का महत्व और भी बढ़ जाता है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची विद्वत्ता अहंकार नहीं, बल्कि मानवता सिखाती है। संविधान को कमजोर करना दरअसल भारत को कमजोर करना है। जो लोग संविधान के खिलाफ खड़े हैं, वे देश की एकता, लोकतंत्र और सामाजिक संतुलन के खिलाफ खड़े हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत को ऐसा संविधान दिया, जो समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है। आज जरूरत है कि हम संविधान को पढ़ें, समझें और उसकी रक्षा करें। बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम उनके बनाए संविधान के साथ मजबूती से खड़े रहें, क्योंकि संविधान रहेगा तभी लोकतंत्र रहेगा, और लोकतंत्र रहेगा तभी भारत सुरक्षित रहेगा।
(लेखक दैनिक यूथ इंडिया के स्टेट हेड है।)


