डॉ आशीष यादव
भारतीय आयुर्वेद और दर्शन के अनुसार मानव शरीर पंचतत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—से बना है। इन तत्वों का संतुलन ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। यदि किसी एक तत्व की कमी या अधिकता हो जाए, तो शरीर में रोग उत्पन्न होने लगते हैं। दुर्भाग्यवश, आधुनिक जीवनशैली में पंचतत्वों का यह संतुलन तेजी से बिगड़ता जा रहा है, जिसका परिणाम व्यापक बीमारियों के रूप में सामने आ रहा है।
पृथ्वी तत्व शरीर को स्थिरता और मजबूती प्रदान करता है। भोजन इसका प्रमुख स्रोत है। आज का भोजन रसायनों, मिलावट और अत्यधिक प्रसंस्करण से प्रभावित है। फास्ट फूड, पैकेज्ड खाद्य पदार्थ और तला-भुना भोजन पृथ्वी तत्व को जरूरत से ज्यादा बढ़ा देता है। इससे मोटापा, कब्ज, सुस्ती, मधुमेह और पेट से जुड़ी अनेक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
जल तत्व शरीर के सभी अंगों के लिए आवश्यक है। इसके बावजूद लोग प्यास लगने पर शुद्ध पानी पीने के बजाय कोल्ड ड्रिंक, कोला और मीठे पेयों का सेवन कर रहे हैं। पर्याप्त पानी न पीने से किडनी, त्वचा, पाचन तंत्र और रक्त संचार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति शरीर को भीतर से कमजोर कर देती है।
अग्नि तत्व का मुख्य स्रोत सूर्य है। आज लोग सुबह की धूप से दूर रहते हैं और अधिकतर समय बंद कमरों में बिताते हैं। सूर्य की किरणें न मिलने से विटामिन-D की कमी, हड्डियों की कमजोरी और रोग प्रतिरोधक क्षमता में गिरावट देखी जा रही है।
वायु तत्व शरीर को प्राण शक्ति देता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में लोग गहरी और पूरी सांस नहीं लेते। इसके कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे थकान, तनाव, घबराहट और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।
आकाश तत्व का संबंध शांति, मौन और मानसिक विस्तार से है। आज का मनुष्य लगातार मोबाइल, टीवी और शोरगुल में घिरा हुआ है। खुला वातावरण और मानसिक शांति न मिलने से अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं।
आज लाखों लोग बीमार इसलिए हैं क्योंकि पंचतत्वों को शरीर तक सही मात्रा और सही तरीके से नहीं पहुंचाया जा रहा। स्वास्थ्य का समाधान केवल दवाइयों में नहीं, बल्कि शुद्ध भोजन, पर्याप्त पानी, धूप, गहरी सांस और मानसिक शांति को जीवन का हिस्सा बनाने में है। पंचतत्वों का संतुलन ही स्वस्थ और सुखी जीवन का आधार है।


