भरत चतुर्वेदी
योगी आदित्यनाथ भारतीय राजनीति में उस धारा का प्रतिनिधित्व करते हैं जहाँ सत्ता केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि विचारधारा के विस्तार का माध्यम बन जाती है। उनका राजनीतिक कद किसी पारंपरिक राजनीतिक प्रशिक्षण, नौकरशाही अनुभव या वंशवादी विरासत से नहीं बना, बल्कि एक स्पष्ट वैचारिक पहचान और कठोर अनुशासन से गढ़ा गया है। यही वजह है कि वे समर्थकों के लिए भरोसे का मजबूत प्रतीक हैं और विरोधियों के लिए सबसे असहज करने वाला चेहरा।
योगी आदित्यनाथ की राजनीति समझौतों पर नहीं, बल्कि स्पष्ट रेखाओं पर आधारित रही है। उन्होंने शुरुआत से ही हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को अपनी राजनीति की धुरी बनाया और कभी संतुलन की भाषा बोलकर अपने पक्ष को धुंधला नहीं किया। राजनीतिक दृष्टि से यह जोखिम भरा कदम था, लेकिन इसी ने उन्हें एक स्थायी और प्रतिबद्ध जनाधार दिया। उनकी राजनीति भावनात्मक अपील करती है, पर उसका संचालन सत्ता की ठोस संरचना के भीतर होता है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने आंदोलनकारी छवि से निकलकर सख्त प्रशासक की भूमिका अपनाई। कानून-व्यवस्था को उन्होंने शासन का सामान्य विषय नहीं रहने दिया, बल्कि इसे राजनीतिक विश्वास का आधार बनाया। माफिया, संगठित अपराध और अराजकता के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने यह संकेत दिया कि सरकार निर्णय लेने में हिचकिचाएगी नहीं। यही सख्ती उनके समर्थकों को सुरक्षा का एहसास देती है और विपक्ष को हमले का अवसर।
उन पर अक्सर पहचान आधारित राजनीति करने का आरोप लगाया जाता है, लेकिन सत्ता में रहते हुए उन्होंने विकास को अपने राजनीतिक एजेंडे से अलग नहीं होने दिया। एक्सप्रेसवे, निवेश सम्मेलन, धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने यह स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं है। राजनीतिक रूप से यह रणनीति “आस्था और विकास” के संयोजन पर आधारित है, जो भाजपा की व्यापक राष्ट्रीय सोच से मेल खाती है।
2022 में दोबारा सत्ता में वापसी योगी आदित्यनाथ के लिए केवल चुनावी जीत नहीं थी, बल्कि उनकी कार्यशैली और राजनीतिक मॉडल की सार्वजनिक स्वीकृति थी। उत्तर प्रदेश जैसे सामाजिक और जातीय रूप से जटिल राज्य में लगातार दूसरी बार बहुमत पाना यह दर्शाता है कि उनकी राजनीति ने पारंपरिक समीकरणों को काफी हद तक पीछे छोड़ दिया। यह जीत विपक्ष के लिए चेतावनी थी कि केवल विरोध की राजनीति योगी मॉडल को चुनौती नहीं दे पाएगी।
राष्ट्रीय राजनीति में योगी आदित्यनाथ को अब एक संभावित बड़े नेता के रूप में देखा जाता है। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी स्पष्टता और निर्णय क्षमता है, लेकिन यही स्पष्टता भविष्य में उनके लिए चुनौती भी बन सकती है यदि सामाजिक संतुलन और संवाद का दायरा सीमित रह गया। भारतीय राजनीति में सत्ता की स्थिरता केवल सख्ती से नहीं, बल्कि व्यापक स्वीकार्यता से भी तय होती है।
योगी आदित्यनाथ की राजनीति अंततः एक ऐसा प्रयोग है जिसमें विचारधारा, प्रशासन और सत्ता एक ही दिशा में आगे बढ़ते हैं। यह प्रयोग कई बार विवादों में घिरा, कई बार सफल साबित हुआ, लेकिन इतना तय है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति की भाषा, प्राथमिकताओं और सत्ता की शैली को निर्णायक रूप से बदल दिया है। आने वाले समय में यही मॉडल यह तय करेगा कि योगी आदित्यनाथ केवल एक प्रभावशाली मुख्यमंत्री बने रहते हैं या भारतीय राजनीति के अगले बड़े अध्याय का चेहरा बनते हैं।





