प्रशांत कटियार
भारतीय पुलिस सेवा में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो अपने पद से नहीं बल्कि अपने आचरण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा से इतिहास में दर्ज होते हैं। श्री राम अरुण ऐसे ही विशिष्ट आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं, जिनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और अनुशासन को समर्पित रहा।
1971 के भारत–पाक युद्ध के दौरान श्री राम अरुण ने जिस निष्ठा और साहस के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया, वह आज भी प्रेरणास्रोत है। युद्धकाल में उनकी सेवाएं असाधारण रहीं। इसी उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें “पूर्वी स्टार (Eastern Star)” से सम्मानित किया गया।
यह तथ्य अत्यंत गौरवपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में यह सम्मान प्राप्त करने वाले वे एकमात्र आईपीएस अधिकारी थे। वे इस सम्मान को अपनी वर्दी पर गर्व के साथ धारण करते थे, जो उनके जीवन भर की उपलब्धियों का प्रतीक रहा।
श्री राम अरुण का प्रशासनिक जीवन सख्त अनुशासन, निष्पक्ष निर्णय और जनहित के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए कानून-व्यवस्था को मजबूती, पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने और जनता के विश्वास को कायम रखने में अहम भूमिका निभाई।
वे अधिकारियों और जवानों के लिए आदर्श नेतृत्वकर्ता थे—जहां सख्ती जरूरी होती, वहां सख्ती; और जहां मानवीय संवेदना की आवश्यकता होती, वहां करुणा।
श्री राम अरुण का व्यक्तित्व सादगी और दृढ़ता का अनूठा संगम था। वे मानते थे कि वर्दी अधिकार नहीं, जिम्मेदारी का प्रतीक है। ईमानदारी, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध उनके जीवन के मूल स्तंभ थे।
उनकी जीवन-यात्रा केवल एक अधिकारी की कहानी नहीं, बल्कि देशसेवा की विरासत है। यही मूल्य उन्होंने अपने परिवार में भी रोपे, जिनकी झलक उनके पुत्र असीम अरुण के सार्वजनिक जीवन में भी स्पष्ट दिखाई देती है।
श्री राम अरुण का नाम भारतीय पुलिस सेवा के उन उज्ज्वल अध्यायों में दर्ज है, जहां कर्तव्य सर्वोपरि रहा और राष्ट्रहित व्यक्तिगत हितों से ऊपर। विजय दिवस जैसे अवसरों पर उनका स्मरण हमें याद दिलाता है कि देश की सेवा ही सर्वोच्च सम्मान है।

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