शरद कटियार
देश की आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुचिता को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ कदम उठाए हैं, वे दूरगामी परिणाम देने वाले साबित हो रहे हैं। सरकारी दावों के अनुसार, करीब 36,000 बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर किया जा चुका है, जो यह दर्शाता है कि अब नियमों और कानूनों के पालन में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा रही।
अमित शाह की अगुवाई में गृह मंत्रालय ने केवल वर्तमान चुनौतियों पर नहीं, बल्कि देश की अगली पीढ़ी के भविष्य पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इसी सोच का परिणाम है SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) जैसी प्रक्रियाओं को सशक्त बनाना—ताकि मतदाता सूची की शुद्धता बनी रहे और लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करने वाले किसी भी प्रयास पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
मतदाता सूची की पारदर्शिता लोकतंत्र की रीढ़ है। अवैध रूप से शामिल नाम न केवल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, बल्कि संसाधनों और नीतिगत निर्णयों पर भी दीर्घकालिक असर डालते हैं। SIR के माध्यम से पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि देश की सरकार चुनने का अधिकार केवल वैध नागरिकों तक ही सीमित रहे।
सुरक्षा, संवेदनशीलता और संतुलन
अमित शाह की कार्यशैली का मूल मंत्र—कानून का सख्त पालन, मानवीय संवेदनशीलता और संवैधानिक मर्यादाओं का संतुलन—स्पष्ट दिखाई देता है। घुसपैठ जैसे जटिल मुद्दों पर उन्होंने भावनाओं से नहीं, बल्कि प्रक्रिया, प्रमाण और परिणाम के आधार पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी।
अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित भारत
जब सीमाएं सुरक्षित हों, पहचान प्रणाली मजबूत हो और लोकतांत्रिक संस्थाएं भरोसेमंद बनें—तभी आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसरों का भारत तैयार होता है। अमित शाह की नीतियां इसी दूरदृष्टि को प्रतिबिंबित करती हैं, जहां सुरक्षा और विकास साथ-साथ चलते हैं।
करीब 36,000 अवैध घुसपैठियों पर कार्रवाई और SIR के जरिए मतदाता सूची की शुद्धता—ये कदम यह संकेत देते हैं कि भारत अब निर्णायक दौर में है। अमित शाह का नेतृत्व देश को एक ऐसे मार्ग पर ले जा रहा है, जहां कानून का राज मजबूत है, लोकतंत्र सुरक्षित है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए राष्ट्र पहले से कहीं अधिक सशक्त।
(लेखक यूथ इंडिया न्यूज ग्रुप के संस्थापक हैं।)





