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Wednesday, March 18, 2026

केरल चुनाव के खातिर भाजपा की तैयारी लम्बे समय से चल रही है

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 अशोक भाटिया , वसई
भाजपा ने केरल में राजधानी तिरुवनंतपुरम की नगर निगम पर पहली बार कब्जा करने के बाद इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राज्य की राजनीति में अपनी महती उपस्थिति दर्ज करा दी है। अब वह विधानसभा में दस्तक देने की तैयारी में जुट गई है। संगठन के स्तर पर पार्टी ने अगले लोकसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति तैयार की है, जिसमें विधानसभा चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति के साथ संगठन प्रभारियों में बदलाव भी शामिल है। इस साल 5 राज्यों असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव होने जा रहे है। वैसे तो भाजपा के लिए सभी राज्य प्रमुख है पर इस बार केरल पर विशेष जोर लगाया जा रहा है ।
भाजपा को उम्मीद है कि केरल में राजधानी तिरुवनंतपुरम की नगर निगम व कुछ नगरपालिकाओं में मिली सफलता के बाद वह विधानसभा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती है। उसकी नजर राज्य की आधा दर्जन सीटों पर है, जहां पर जीत सकती है। अभी तक भाजपा को केरल के इतिहास में केवल एक बार 2026 में ही एक विधानसभा सीट जीतने का मौका मिला था, जब ओ राजगोपाल ने नेमम सीट जीती थी। इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनाव में उसने त्रिशूर का लोकसभा चुनाव जीता था, जिसमें फिल्म अभिनेता गोपी सुरेश की अपनी लोकप्रियता भी शामिल थी।
अब भाजपा राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। राज्य में हिंदू समुदाय को वामपंथी दलों के समर्थन से अपने साथ लाने की कोशिशों के साथ वह ईसाई समुदाय को भी साध रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लगातार ईसाई समुदाय के प्रमुख नेताओं से मिलते रहते हैं और हर साल क्रिसमस पर चर्च जाकर प्रार्थना में भी हिस्सा लेते हैं। देश में केरल ही एक मात्र राज्य हैं जहां वामपंथी शासन में है। अब भाजपा यहां पर उसके ही समर्थक वर्ग में सेंध लगा रही है। ध्रुवीकरण की राजनीति में वह कांग्रेस के साथ सीधे मुकाबले की कोशिश कर रही है। अब जबकि निकाय चुनावों से कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता का प्रबल दावेदार बन कर उभरा है, उस समय भाजपा खुद को माकपा की जगह विपक्ष की राजनीति में स्थापित करने की कोशिश में है।
इस तयारी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केरल का दौरा भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के मिशन 2026 ‘हम विकसित केरल चाहते हैं’ को लॉन्च करने के लिए तिरुवनंतपुरम पहुंचे तो संदेश बिलकुल सीधा और साफ था। राज्य में भाजपा लंबे समय से अपनी पकड़ बनाने के लिए संघर्ष कर रही है और शाह पार्टी की इसी कोशिश को आगे बढ़ाने के लिए पहुंचे । अभियान का स्‍लोगन भी उनके इस इरादे की पुष्टि करता है और यह स्‍लोगन है- जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा। भाजपा द्वारा चुने गए 2,000 से अधिक स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को शाह ने संबोधित किया और पार्टी के आगामी लक्ष्‍यों को साफ किया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल वोट शेयर बढ़ाने के लिए चुनाव नहीं लड़ रही है, बल्कि एक ऐसे भविष्य की दिशा में काम कर रही है, जहां केरल में भाजपा का मुख्यमंत्री हो।
इस दौरान शाह ने केरल के प्रमुख राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला था और आरोप लगाया था कि एलडीएफ और यूडीएफ के बीच “मैच फिक्सिंग” के कारण वर्षों से विकास रुका हुआ है। उन्‍होंने कहा कि सत्ता इन दोनों के बीच बदलती रहती है, लेकिन इनकी प्राथमिकताएं काफी समान रहती हैं, जिसके कारण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍टों में देरी होती है और नीतिगत निष्क्रियता बनी रहती है, जिससे आर्थिक अवसरों का नुकसान होता है। साथ ही शाह ने तर्क दिया कि भाजपा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मतदाताओं को विकास केंद्रित तीसरा विकल्प प्रदान करना और इस राजनीतिक चक्र को तोड़ना है।
चुनावी आंकड़ों से पता चलता है कि भाजपा का यह आत्मविश्वास बेवजह नहीं है। केरल में एनडीए का वोट शेयर लगातार बढ़ा है। 2001 में भाजपा का वोट शेयर करीब 3% था जो 2016 और 2021 के बीच बढ़कर 12-15% हो गया है। हालांकि वोटों में यह बढ़ोतरी विधानसभा सीटों में आनुपातिक रूप से परिवर्तित नहीं हुई है। हालांकि बार-बार हार के बावजूद पार्टी का संगठनात्मक आधार बरकरार है।
गौरतलब है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पिछले दो स्थानीय निकाय चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभर कर सामने आई है। वहीं हालिया चुनाव में उसने 101 वार्डों में से 50 वार्ड जीतकर इतिहास रच दिया और पहली बार केरल में भाजपा का मेयर बना। सभी छह नगर निगमों में भाजपा-एनडीए गठबंधन ने 23% से अधिक का वोट शेयर हासिल किया, जिससे यह विश्‍वास मजबूत हुआ है कि शहरी मतदाता विशेषकर युवा, पार्टी के विकास के दावों को गंभीरता से ले रहा है। अमित शाह ने बताया कि 79 ग्राम पंचायतों में भाजपा दूसरे स्थान पर रही और यह सब दर्शाता है कि भाजपा केवल शहर केंद्रित पार्टी नहीं है।
सबरीमाला मुद्दे को पार्टी में धीमी गति से विकसित होने वाले राजनीतिक फैक्‍टर के रूप में देखा जाता है। हालांकि इसका चुनावी प्रभाव क्षेत्र के अनुसार भिन्न-भिन्न है, भाजपा का मानना है कि इसने हिंदू मतदाताओं के कुछ वर्गों के साथ पार्टी का स्थायी संबंध बनाने में मदद की है, खासतौर पर दक्षिणी केरल में।
स्थानीय निकाय चुनाव के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि एझवा ओबीसी समुदाय के कुछ वर्गों के मतदान में बदलाव आया है, जिसे पारंपरिक रूप से वामपंथी झुकाव वाला समुदाय माना जाता है। यहां पर सीमित बदलाव भी करीबी मुकाबले वाले निर्वाचन इलाके में निर्णायक साबित हो सकता है क्योंकि ओबीसी समुदाय हिंदू समुदाय का 26 प्रतिशत है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के शीर्ष नेता के सुरेंद्रन, वी मुरलीधरन और शोभा सुरेंद्रन भी ओबीसी समुदाय से आते हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक सूझबूझ को प्रदर्शित किया है।
तिरुवनंतपुरम जिला भाजपा का प्रमुख चुनावी क्षेत्र बनकर उभरा है। नेमोम, वट्टियूरकावु, कझाकूटम, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल और अटिंगल जैसी सीटों पर अब कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अटिंगल में पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने पिछले लोकसभा चुनाव में 3 लाख से अधिक वोट प्राप्त किए थे और तीसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन शीर्ष दो उम्मीदवारों के काफी करीब थे। भाजपा ऐसे प्रदर्शन को इस बात का प्रमाण मानती है कि वह पारंपरिक वोट बैंकों में सेंध लगाकर रणनीतिक रूप से बदलाव ला सकती है। अटिंगल में भाजपा का वोट शेयर 2019 में 24। 97% से बढ़कर 2024 में 31। 64% हो गया है। उत्तरी केरल में कासरगोड का मंजेश्वरम एक प्रतीकात्मक स्थान रखता है। भाजपा नेता के सुरेंद्रन एक बार वहां मात्र 80 वोटों से हार गए थे, जो इस बात को बताता है कि मामूली अंतर भी राजनीतिक परिणामों को बदल सकता है।
केरल की करीब 48% आबादी ईसाई और मुस्लिम है, इसलिए अल्पसंख्यक संपर्क भाजपा की रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है। त्रिशूर में सुरेश गोपी की जीत को बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ईसाई समुदाय के साथ जुड़ाव के लिहाज से। गोपी ने 2024 में त्रिशूर लोकसभा सीट 4,12,338 वोटों (37। 8% वोट शेयर) से जीती, जो केरल में पार्टी की पहली संसदीय जीत थी। उन्होंने 74,686 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इसे जातिगत भेदभाव से परे हिंदू एकजुटता का प्रतीक माना गया।
हाल ही में केरल की राजनीति में और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कॉरपोरेट समर्थित क्षेत्रीय पार्टी Twenty20 ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की घोषणा कर दी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने हाल ही में राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में Twenty20 के प्रदेश अध्यक्ष साबू एम। जैकब का गठबंधन में स्वागत किया। साबू जैकब ने कहा कि पार्टी ने गठबंधन राजनीति से दूरी बनाए रखने की अपनी दशक पुरानी नीति को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ, यूडीएफ, एसडीपीआई और वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के कथित गठजोड़ से Twenty20 को लगभग अस्तित्व का संकट झेलना पड़ा। पार्टी अपने चार में से दो पंचायत क्षेत्रों में हार गई, हालांकि नए इलाकों में उसने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
जैकब ने कहा कि स्थानीय चुनावों के दौरान पार्टी के खिलाफ जिस तरह का माहौल बना, वह उनके लिए आंखें खोलने वाला अनुभव रहा। उन्होंने दावा किया कि Twenty20 की विकास की सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से मेल खाती है। उन्‍होंने कहा कि हमारे अस्तित्व को खत्म करने की कोशिश करने वाले राजनीतिक गठजोड़ के खिलाफ हमें मजबूत सहयोगियों की जरूरत थी और एनडीए से बेहतर विकल्प हमें नहीं मिला। उन्होंने केरल की राजनीति में एलडीएफ-यूडीएफ द्विध्रुवीय व्यवस्था को राज्य के विकास में बाधक बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और घोटालों से भरी राजनीति के चलते पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए राज्य छोड़ने को मजबूर हैं। जैकब ने आरोप लगाया कि केरल निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल नहीं रहा है और एलडीएफ सरकार की कथित शत्रुतापूर्ण नीतियों के कारण उन्हें अपना गारमेंट व्यवसाय आंशिक रूप से तेलंगाना स्थानांतरित करना पड़ा, जहां उन्होंने 50,000 रोजगार सृजित किए।
जैकब ने यह भी कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में Twenty20 का प्रदर्शन कमजोर नहीं रहा, बल्कि पार्टी का वोट शेयर 9 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया और वह कोल्लम तथा पलक्कड़ में एक निर्णायक तीसरी शक्ति के रूप में उभरी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ट्वेंटी20 के एनडीए में शामिल होने से केरल में गठबंधन का विस्तार तेज होगा। उन्होंने बताया कि साबू जैकब शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तिरुवनंतपुरम दौरे के दौरान मंच साझा करेंगे।
इससे पहले, जनाधिपत्य संरक्षण समिति (जेएसएस) के एक धड़े ने भी एनडीए में शामिल होने की घोषणा की। हालांकि, जेएसएस के प्रदेश सचिव राजन बाबू ने पार्टी में विभाजन से इनकार करते हुए कहा कि पूर्व विधायक ए। वी। थमराक्षण को पहले ही संगठन से निष्कासित किया जा चुका है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे एनडीए और भाजपा की तैयारी बताई जा रही है।
अशोक भाटिया,
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार ,लेखक, समीक्षक, एवं टिप्पणीकार
वसई पूर्व – 401208 ( मुंबई )E MAIL – vasairoad.yatrisangh@gmail.com व्हाट्स एप्प 9221232130

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