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Tuesday, March 10, 2026

30 साल से कम उम्र में क्यों खराब हो रही है पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी? डॉक्टरों से जानें कारण और बचाव

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यूथ इंडिया
पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए स्पर्म का स्वस्थ होना बेहद जरूरी माना जाता है। स्पर्म को तभी हेल्दी कहा जाता है जब उसकी क्वालिटी, क्वांटिटी और मोटिलिटी यानी गति सभी सही हों। यही तीनों चीजें फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अगर किसी वजह से स्पर्म की गुणवत्ता या संख्या कम हो जाती है, तो भविष्य में पुरुषों को पिता बनने में दिक्कत आ सकती है।

आमतौर पर यह माना जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी और स्पर्म काउंट में कमी आने लगती है। इसे उम्र से जुड़ा सामान्य बदलाव माना जाता है और सही खानपान व स्वस्थ जीवनशैली के जरिए इसे काफी हद तक नियंत्रित भी किया जा सकता है। लेकिन हाल के वर्षों में डॉक्टरों ने एक चिंताजनक ट्रेंड देखा है। अब 30 साल से कम उम्र के पुरुषों में भी स्पर्म क्वालिटी खराब होने के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि पहले इस तरह की समस्या आमतौर पर अधिक उम्र के पुरुषों में देखने को मिलती थी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इतनी कम उम्र में पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी क्यों प्रभावित हो रही है और इसके पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं।

फर्टिलिटी एक्सपर्ट गौरव चौधरी के अनुसार आज के समय में युवा पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी खराब होने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक 28 वर्षीय कॉर्पोरेट कर्मचारी की स्पर्म क्वालिटी बेहद खराब पाई गई, जबकि वह न तो शराब पीता था, न धूम्रपान करता था और न ही किसी तरह के नशीले पदार्थों का सेवन करता था। जांच के बाद पता चला कि उसकी खराब स्पर्म क्वालिटी का मुख्य कारण अत्यधिक मानसिक तनाव था।

विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव का असर केवल दिमाग तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। जब शरीर में हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं, तो इसका असर स्पर्म प्रोडक्शन और उसकी क्वालिटी पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि आज के समय में काम का दबाव, तनाव और मानसिक थकान जैसी समस्याएं भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

कई रिसर्च में भी यह बात सामने आई है कि पुरुषों की फर्टिलिटी केवल उम्र पर निर्भर नहीं करती। इसके अलावा जीवनशैली से जुड़े कई कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, हार्मोनल असंतुलन और पर्यावरण से जुड़े कई कारण भी स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित कर सकते हैं।

मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले के अनुसार पुरुषों की स्पर्म क्वालिटी कई तरह के फैक्टर्स पर निर्भर करती है और इनमें जीवनशैली से जुड़ी आदतों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है। आज के समय में युवाओं की कुछ आदतें ऐसी हैं जो धीरे-धीरे उनकी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।

उदाहरण के तौर पर धूम्रपान यानी स्मोकिंग का असर स्पर्म क्वालिटी पर काफी नकारात्मक पड़ता है। सिगरेट में मौजूद निकोटिन और अन्य हानिकारक रसायन स्पर्म काउंट को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही ये स्पर्म के डीएनए को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे स्पर्म की मोटिलिटी और उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

इसी तरह मोटापा भी एक बड़ा कारण माना जाता है। हाल के वर्षों में युवाओं में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है, जिसका असर शरीर के कई सिस्टम पर पड़ता है। जब शरीर का बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो इससे हार्मोनल संतुलन बिगड़ने लगता है। इस स्थिति में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है, जिससे स्पर्म प्रोडक्शन प्रभावित हो जाता है।

मानसिक तनाव भी स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारण है। लगातार तनाव में रहने से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे टेस्टोस्टेरोन का स्तर प्रभावित हो सकता है। इससे न केवल स्पर्म क्वालिटी प्रभावित होती है, बल्कि पुरुषों में यौन इच्छा यानी लिबिडो भी कम हो सकती है। कुछ मामलों में यह स्थिति स्तंभन दोष यानी इरेक्टाइल डिसफंक्शन तक का कारण बन सकती है।

इसके अलावा आज की आधुनिक जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा रही है। देर रात तक जागना, पर्याप्त नींद न लेना, जंक फूड का अधिक सेवन करना और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारक भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि अच्छी बात यह है कि अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो कम उम्र में भी स्पर्म क्वालिटी को बेहतर बनाया जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्ति अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाए। विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित और पोषक आहार का सेवन स्पर्म हेल्थ के लिए बेहद जरूरी होता है। ताजी हरी सब्जियां, मौसमी फल, नट्स और सीड्स जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते हैं और स्पर्म प्रोडक्शन को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

नियमित रूप से व्यायाम करना भी पुरुषों के लिए लाभदायक माना जाता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट तक एक्सरसाइज करने से शरीर का वजन नियंत्रित रहता है और हार्मोनल संतुलन भी बेहतर बना रहता है। इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और प्रजनन क्षमता पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

इसके साथ ही नशीले पदार्थों से दूरी बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। शराब और धूम्रपान का सेवन स्पर्म क्वालिटी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इनसे बचना बेहतर माना जाता है।

मानसिक तनाव को कम करना भी बेहद जरूरी है। योग, ध्यान और रिलैक्सेशन तकनीकें तनाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। जब मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, तो शरीर के हार्मोन भी संतुलित रहते हैं और इसका सकारात्मक प्रभाव प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी पुरुष को स्पर्म क्वालिटी से जुड़ी समस्या का संदेह हो या लंबे समय तक गर्भधारण में दिक्कत आ रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। सही जांच और उपचार के जरिए इस समस्या का समाधान किया जा सकता है।

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि स्पर्म क्वालिटी का अच्छा होना पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए बेहद जरूरी है। हाल के वर्षों में कम उम्र के पुरुषों में भी स्पर्म क्वालिटी खराब होने के मामले सामने आ रहे हैं, जो चिंता का विषय है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि युवा अपनी जीवनशैली को स्वस्थ बनाएं, संतुलित आहार लें, तनाव को नियंत्रित रखें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने में संकोच न करें। ऐसा करने से भविष्य में प्रजनन से जुड़ी समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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