– प्यास बुझाने के नाम पर मीठे पेय का बढ़ता चलन, शरीर में पानी की कमी और बीमारियों का खतरा
आज की बदलती जीवनशैली में युवाओं के खानपान और पेय पदार्थों की आदतों में तेजी से बदलाव आया है। पहले जहां प्यास बुझाने के लिए पानी या नींबू पानी जैसे प्राकृतिक पेय का उपयोग किया जाता था, वहीं अब बड़ी संख्या में युवा कोल्ड ड्रिंक और मीठे कार्बोनेटेड पेय का सेवन करने लगे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कम पानी पीना और उसकी जगह कोल्ड ड्रिंक का अधिक सेवन करना शरीर के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है।
शरीर में पानी की कमी का खतरा
मानव शरीर का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है।
जब शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलता तो डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे थकान, चक्कर, सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कोल्ड ड्रिंक में ज्यादा चीनी
विशेषज्ञों के अनुसार कोल्ड ड्रिंक में बहुत अधिक मात्रा में चीनी और कैफीन पाया जाता है। एक सामान्य कोल्ड ड्रिंक के कैन में लगभग 8 से 10 चम्मच तक चीनी हो सकती है, जो शरीर के लिए हानिकारक मानी जाती है।
अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों का सेवन करने से मोटापा, मधुमेह और दांतों की समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
पाचन और हड्डियों पर असर
कोल्ड ड्रिंक में मौजूद गैस और रसायन पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकते हैं। लगातार इनका सेवन करने से पेट में गैस, एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
कुछ शोधों के अनुसार इन पेय पदार्थों में मौजूद फॉस्फोरिक एसिड हड्डियों की मजबूती पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
आज के समय में स्कूल, कॉलेज और कैफे संस्कृति के कारण युवाओं में कोल्ड ड्रिंक पीने की आदत तेजी से बढ़ रही है। कई युवा पानी की बजाय बार-बार कोल्ड ड्रिंक पीना पसंद करते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि युवाओं को प्यास लगने पर सबसे पहले पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। इसके अलावा नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी या ताजे फलों का रस भी बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
कम पानी और ज्यादा कोल्ड ड्रिंक, सेहत के लिए खतरा


