29 C
Lucknow
Monday, March 2, 2026

यूथ पावर की होली: समाज सेवा के रंग

Must read

होली का त्योहार परंपरागत रूप से उल्लास और उमंग का प्रतीक रहा है, लेकिन आज की युवा पीढ़ी इसे एक नए अर्थ के साथ जी रही है। अब रंग केवल दोस्तों और परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के उन वर्गों तक भी पहुंच रहे हैं, जो अक्सर उत्सव की मुख्यधारा से दूर रह जाते हैं।
कई शहरों और कस्बों में युवा होली के दिन अनाथालय, वृद्धाश्रम और जरूरतमंद बस्तियों में जाकर रंग और मिठास बांटते हैं। वहां गुलाल से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है साथ बैठकर मुस्कुराना, हालचाल पूछना और अपनापन देना। यह पहल बताती है कि नई पीढ़ी त्योहार को केवल व्यक्तिगत आनंद तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ती है।
वृद्धाश्रमों में जब युवा बुजुर्गों के साथ सूखी और सुरक्षित होली खेलते हैं, तो वहां रंगों से अधिक भावनाओं की चमक दिखाई देती है। अनाथालयों में बच्चों के साथ गीत-संगीत और मिठाई बांटने का दृश्य इस बात का प्रमाण है कि सच्चा उत्सव वही है, जो साझा किया जाए।
यह होली दिखावे से दूर, संवेदनशीलता और सेवा का प्रतीक बनती जा रही है। कई युवा समूह इस दिन रक्तदान शिविर, सफाई अभियान या जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरण जैसी गतिविधियां भी आयोजित करते हैं। यह सोच बताती है कि उत्सव केवल आनंद का अवसर नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व निभाने का भी समय है।
रंगों से बढ़कर रिश्ते बांटना ही सच्ची युवा शक्ति है। जब होली सेवा और सहानुभूति के साथ मनाई जाती है, तो उसका प्रभाव एक दिन से कहीं आगे तक जाता है।
नई पीढ़ी यह संदेश दे रही है कि होली का असली रंग करुणा, सहयोग और एकजुटता में छिपा है। यदि हर युवा अपने उत्सव का एक हिस्सा समाज सेवा को समर्पित कर दे, तो यह पर्व केवल रंगों का नहीं, बल्कि मानवता का भी उत्सव बन जाएगा।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article