– क्या सचमुच हमारी कोशिकाओं की “घड़ी” है टेलोमीयर?
यूथ इंडिया
मानव शरीर की हर कोशिका में जीवन का एक मौन रिकॉर्ड छिपा होता है—उसे कहते हैं टेलोमीयर (Telomeres)। ये हमारे डीएनए के सिरों पर मौजूद सुरक्षात्मक कैप की तरह होते हैं, जो हर बार कोशिका विभाजन के साथ थोड़ा-थोड़ा छोटे होते जाते हैं। वैज्ञानिक इन्हें हमारी जैविक उम्र (Biological Age) का संकेतक मानते हैं।
हमारी कोशिकाओं में मौजूद गुणसूत्र (Chromosomes) डीएनए से बने होते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र के सिरे पर टेलोमीयर नामक संरचना होती है।
इसे समझने के लिए जूते के फीते के सिरों पर लगी प्लास्टिक कैप की कल्पना कीजिए—यदि वह कैप टूट जाए तो फीता उधड़ने लगता है। ठीक उसी तरह टेलोमीयर डीएनए को क्षति से बचाते हैं।
जब कोशिकाएं विभाजित होती हैं, तो टेलोमीयर की लंबाई घटती जाती है। एक समय ऐसा आता है जब वे इतने छोटे हो जाते हैं कि कोशिका विभाजन बंद हो जाता है—और यही उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि टेलोमीयर की लंबाई कम होना:
बुढ़ापे की प्रक्रिया है –
हृदय रोग,मधुमेह,कैंसर,अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ा हो सकता है,हालांकि टेलोमीयर अकेला कारण नहीं है, लेकिन यह उम्र और स्वास्थ्य की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण जैविक संकेतक है।
अध्ययन बताते हैं कि दीर्घकालिक मानसिक तनाव टेलोमीयर को तेजी से छोटा कर सकता है।
अवसाद,चिंता,सामाजिक अलगाव,
आर्थिक असुरक्षा,इन सभी का असर कोशिकाओं पर पड़ता है।कुछ शोधों में पाया गया है कि लंबे समय तक तनाव में रहने वाले लोगों के टेलोमीयर अपेक्षाकृत छोटे होते हैं।
हाँ, आंशिक रूप से।
वैज्ञानिकों के अनुसार ये उपाय मददगार हो सकते हैं जैसे संतुलित आहार (फल, सब्जियां, एंटीऑक्सीडेंट), नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, ध्यान और योग,धूम्रपान से दूरी,सामाजिक जुड़ाव शामिल हैं।
कुछ शोधों में यह भी पाया गया कि ध्यान (Meditation) और सकारात्मक सोच टेलोमीयर की लंबाई को संरक्षित रखने में सहायक हो सकते हैं।
शरीर में एक एंजाइम होता है—टेलोमेरेज़ (Telomerase)—जो टेलोमीयर की मरम्मत में मदद करता है।
दिलचस्प बात यह है कि कैंसर कोशिकाओं में यह एंजाइम अत्यधिक सक्रिय होता है, जिससे वे अनियंत्रित रूप से विभाजित होती रहती हैं। इसलिए टेलोमीयर और कैंसर के बीच जटिल संबंध है।
दो व्यक्ति जिनकी उम्र 50 वर्ष है, उनकी जैविक उम्र अलग-अलग हो सकती है।जिसके टेलोमीयर लंबे हैं, उसकी कोशिकाएं अपेक्षाकृत युवा हो सकती हैं।
इसलिए अब वैज्ञानिक “क्रोनोलॉजिकल एज” (वास्तविक उम्र) के साथ “बायोलॉजिकल एज” (जैविक उम्र) पर भी ध्यान दे रहे हैं।
टेलोमीयर पर शोध तेजी से बढ़ रहा है। भविष्य में संभव है कि
टेलोमीयर परीक्षण से उम्र-संबंधी जोखिम का आकलन हो,जीवनशैली आधारित चिकित्सा विकसित हो,
बुढ़ापे को धीमा करने की रणनीतियां बनें।
लेकिन अभी यह क्षेत्र शोध के चरण में है और इसे अंतिम समाधान नहीं माना जा सकता।
टेलोमीयर हमें यह याद दिलाते हैं कि उम्र केवल कैलेंडर का अंक नहीं है।हमारी जीवनशैली, तनाव, भोजन और मानसिक स्थिति हमारी कोशिकाओं पर असर डालती है।
स्वस्थ जीवन का अर्थ केवल लंबा जीवन नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण जीवन है।और शायद, हमारी कोशिकाओं के सिरों पर मौजूद ये छोटे-से टेलोमीयर हमें यही संदेश देते हैं—
अपने शरीर और मन का ख्याल रखें, क्योंकि जीवन हर दिन कोशिकाओं के स्तर पर लिखा जा रहा है।

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