सौरभ टंडन
21वीं सदी की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रूप में दुनिया के सामने है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और प्रशासन—हर क्षेत्र में AI तेजी से अपनी जगह बना रहा है। भारत भी इस परिवर्तन से अछूता नहीं है। हाल ही में आयोजित एआई समिट में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने स्पष्ट किया कि भारत केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार का नेतृत्वकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वह तकनीक है जो मशीनों को सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता देती है। मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और रोबोटिक्स इसके प्रमुख आधार हैं। एआई के माध्यम से बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर सटीक निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया तेज और प्रभावी बनती है।
आज अस्पतालों में रोगों की प्रारंभिक पहचान, स्कूलों में स्मार्ट लर्निंग सिस्टम, खेतों में मौसम और उत्पादन का विश्लेषण तथा उद्योगों में ऑटोमेशन—ये सब एआई के कारण संभव हो पाया है।
एआई समिट में प्रधानमंत्री ने “AI फॉर ऑल” का मंत्र दिया। उनका स्पष्ट संदेश था कि तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग केवल बड़े उद्योगों तक सीमित न रहे, बल्कि किसान, छात्र, छोटे व्यापारी और स्टार्टअप भी इससे लाभान्वित हों।
प्रधानमंत्री ने भारत की युवा शक्ति और स्टार्टअप संस्कृति पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के युवा नवाचार के माध्यम से वैश्विक मंच पर भारत की पहचान मजबूत कर सकते हैं।
डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाई। अब उसी आधार पर एआई आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं। सरकार डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नैतिक एआई के उपयोग पर भी विशेष ध्यान दे रही है, ताकि तकनीक मानवता के हित में कार्य करे।
एआई जहां नई नौकरियों और स्टार्टअप के अवसर पैदा कर रहा है, वहीं पारंपरिक रोजगार के स्वरूप में बदलाव भी ला रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक होगा। डेटा गोपनीयता, साइबर खतरे और नैतिक उपयोग जैसी चुनौतियों का समाधान भी समानांतर रूप से करना होगा।
एआई समिट के मंच से यह संदेश गया कि भारत तकनीक को मानव कल्याण के लिए उपयोग करने का पक्षधर है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि एआई का विकास जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
एआई केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एआई के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है। यदि नीति, नवाचार और नैतिकता का संतुलन बनाए रखा गया, तो आने वाले वर्षों में भारत विश्व के एआई मानचित्र पर अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
एआई युग में भारत की नई छलांग: प्रधानमंत्री का विज़न और देश की दिशा


