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Thursday, February 19, 2026

भारतीय ज्ञान परंपरा और विज्ञान शिक्षा : सोच-समझकर आगे बढ़ने की आवश्यकता

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डॉ विजय गर्ग
भारत की ज्ञान परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। यहाँ शिक्षा केवल जीविका कमाने का माध्यम नहीं थी, बल्कि जीवन को समझने, प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने और मानव कल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का साधन थी। आज जब विज्ञान और तकनीक का युग है, तब यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या हमारी आधुनिक विज्ञान शिक्षा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़कर आगे बढ़ रही है या उससे कटती जा रही है।

भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि

भारतीय परंपरा में ज्ञान को समग्र रूप में देखा गया। वेद और उपनिषद में ब्रह्मांड, प्रकृति, चेतना और जीवन के रहस्यों पर गहन विचार मिलता है। आचार्य चरक और सुश्रुत ने आयुर्वेद और शल्य चिकित्सा में वैज्ञानिक पद्धतियों का प्रयोग किया। आर्यभट ने खगोल विज्ञान और गणित में ऐसे सिद्धांत दिए जो आधुनिक विज्ञान की नींव से मेल खाते हैं।

यह परंपरा अनुभव, अवलोकन और तर्क पर आधारित थी — जो विज्ञान की मूल आत्मा है।

आधुनिक विज्ञान शिक्षा की चुनौतियाँ

आज की शिक्षा प्रणाली में विज्ञान को अक्सर परीक्षा और अंकों तक सीमित कर दिया गया है। विद्यार्थी सूत्र याद करते हैं, प्रयोगों का उद्देश्य समझे बिना उन्हें दोहराते हैं और विज्ञान को जीवन से जोड़ने में असफल रहते हैं।

मुख्य चुनौतियाँ हैं:

रटने की प्रवृत्ति, समझ की कमी

प्रयोगात्मक शिक्षा का अभाव

प्रकृति और स्थानीय ज्ञान से दूरी

विज्ञान को नैतिकता और जीवन मूल्यों से अलग देखना

भारतीय ज्ञान परंपरा से क्या सीखें?

भारतीय ज्ञान परंपरा विज्ञान शिक्षा को अधिक जीवन्त और प्रासंगिक बना सकती है।

1. समग्र दृष्टिकोण
ज्ञान को अलग-अलग विषयों में बाँटने के बजाय जीवन से जोड़कर समझना।

2. अनुभव आधारित सीखना
प्रकृति का अवलोकन, औषधीय पौधों का अध्ययन, स्थानीय पर्यावरण की समझ।

3. विज्ञान और नैतिकता का संतुलन
विज्ञान का उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए, केवल तकनीकी प्रगति नहीं।

4. प्रश्न पूछने की संस्कृति
उपनिषदों की संवाद परंपरा जिज्ञासा और चिंतन को बढ़ावा देती है।

विज्ञान शिक्षा में परंपरा का समावेश कैसे हो?

पाठ्यक्रम में भारतीय वैज्ञानिकों और परंपरागत ज्ञान को शामिल किया जाए

योग, आयुर्वेद, पर्यावरणीय ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टि से पढ़ाया जाए

स्थानीय ज्ञान प्रणालियों का दस्तावेजीकरण और अध्ययन

प्रयोगात्मक एवं प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा को बढ़ावा

विज्ञान को सामाजिक समस्याओं के समाधान से जोड़ा जाए

सावधानी भी आवश्यक

परंपरा को अपनाते समय अंधविश्वास और वैज्ञानिक सोच में अंतर समझना जरूरी है। हर परंपरागत विचार वैज्ञानिक नहीं होता। इसलिए:

प्रमाण और परीक्षण आवश्यक हैं

वैज्ञानिक पद्धति का पालन अनिवार्य है

तर्क और विवेक को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

आगे की राह

भारत यदि ज्ञान महाशक्ति बनना चाहता है, तो उसे अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। भारतीय ज्ञान परंपरा हमें सोचने, प्रश्न करने और प्रकृति के साथ संतुलन में जीने की प्रेरणा देती है, जबकि आधुनिक विज्ञान हमें खोज, नवाचार और तकनीकी प्रगति की दिशा दिखाता है।

दोनों का समन्वय ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

विज्ञान तभी सार्थक है जब वह ज्ञान, संवेदनशीलता और मानवता के साथ जुड़ा हो — और यही भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल संदेश है।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

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