शरद कटियार
आतंकवाद केवल हिंसा नहीं है, यह एक सोच है—ऐसी सोच जो डर के सहारे समाज को झुकाना चाहती है। लेकिन भारत का इतिहास गवाह है कि यह राष्ट्र भय से नहीं, साहस से चलता है। जब-जब आतंक ने भारत को चुनौती देने की कोशिश की है, देश ने संयम भी दिखाया है और आवश्यक होने पर निर्णायक जवाब भी दिया है। आतंक नाम पर दहशत फैलाने वालों को पहले भी घर में घुसकर मारा था बाज न आए तो फिर घुसकर मारेंगे।
भारत दशकों से आतंकवाद का सामना करता आया है। सीमापार से प्रायोजित हमले, आतंकी साजिशें, शहरों में विस्फोट, सुरक्षाबलों पर हमले—इन सबने देश की परीक्षा ली। संसद पर हमला हो, महानगरों में सीरियल ब्लास्ट हों या सीमाओं पर घुसपैठ की कोशिशें—हर घटना ने भारत को और अधिक सतर्क और मजबूत बनाया।
आज का भारत केवल प्रतिक्रिया देने वाला राष्ट्र नहीं है, बल्कि रणनीतिक सोच के साथ आगे बढ़ने वाला देश है।
सीमाओं पर अत्याधुनिक निगरानी तंत्र तैनात है।खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हुआ है।साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा माना जा रहा है।
आतंकी वित्तपोषण पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंक को पनाह देने वालों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब करेगा। कूटनीतिक दबाव, वैश्विक सहयोग और प्रतिबंधों के माध्यम से आतंक के नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं।
आतंक का उद्देश्य केवल जान-माल की हानि नहीं होता। उसका लक्ष्य है—समाज में भय और अविश्वास फैलाना, अर्थव्यवस्था को अस्थिर करना और सामाजिक ताने-बाने को तोड़ना।
लेकिन भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। यहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन राष्ट्रहित सर्वोपरि है। जब देश एकजुट होकर खड़ा होता है, तब आतंक का एजेंडा स्वतः विफल हो जाता है।
आतंकवाद से निपटने के लिए कठोर कानून और प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है।
संदिग्ध संगठनों पर प्रतिबंध, आतंकी गतिविधियों की वित्तीय जांच, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी
सीमा प्रबंधन को सुदृढ़ करना ये सभी उपाय केवल सुरक्षा बलों का कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संकल्प का हिस्सा हैं।
आतंकवाद का मुकाबला केवल हथियारों से नहीं, बल्कि विचारों से भी होता है। युवाओं को जागरूक, तकनीकी रूप से सक्षम और राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्ध होना होगा। सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रामक प्रचार से बचना और सही जानकारी का प्रसार करना भी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
भारत शांति चाहता है, लेकिन शांति का अर्थ कमजोरी नहीं है। यदि कोई भारत की संप्रभुता, सुरक्षा और नागरिकों को चुनौती देता है, तो राष्ट्र वैधानिक, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर जवाब देने में सक्षम है।
हम भारत हैं हम सहिष्णु हैं, पर असहाय नहीं।हम शांतिप्रिय हैं, पर कमजोर नहीं।हम विकास के पथ पर अग्रसर हैं, पर अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हैं।आतंक की हर चुनौती का जवाब कानून, रणनीति और राष्ट्रीय एकता से दिया जाएगा।

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